पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल तारापीठ में सोमवार तड़के एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। यहां एक चार मंजिला होटल में भीषण आग लगने से कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, आग सुबह करीब 5 बजे होटल के ग्राउंड फ्लोर पर लगी, उस समय ज्यादातर श्रद्धालु और होटल में ठहरे मेहमान गहरी नींद में थे। देखते ही देखते आग और धुआं ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गया, जिससे कई लोग अंदर फंस गए।
👉 यह भी पढ़ें:
- उत्तर 24 परगना में अमोनिया गैस लीक: बर्फ कारखाने से 25 ग्रामीण बीमार, सड़क पर उतरे लोग
- कोलकाता होटल में भीषण आग: 9 लोगों की मौत, 6 घायल; बंगाल में लगातार दूसरे बड़े अग्निकांड से सुरक्षा पर सवाल
- TMC नेता आशीष बनर्जी की मौत: रामपुरहाट में आवास के पास पार्टी कार्यालय से मिला शव, जांच जारी
- West Bengal में ममता बनर्जी के काफिले पर हमला, लोगों ने गाड़ी पर पानी, पत्थर और जूते फेंके
- West Bengal: कोयल मल्लिक के इस्तीफे पर भड़कीं ममता बनर्जी, कहा-जिसे जहां जाना है 21 जुलाई से पहले चला जाए
- West Bengal Rape Murder Case: 12 साल की बच्ची के रेप-मर्डर का मुख्य आरोपी पुलिस एनकाउंटर में ढेर, Crime Scene Recreation के दौरान छीन ली थी राइफल

घटना की सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां और पुलिस टीम मौके पर पहुंचीं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और होटल में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। घायलों को इलाज के लिए रामपुरहाट गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया है।
शुरुआती जानकारी में होटल प्रबंधन की ओर से शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह बताया गया है। हालांकि, आग की वास्तविक वजह और होटल में मौजूद फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर जांच जारी है।
तारापीठ एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां देशभर से श्रद्धालु मां तारा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में होटल अग्निकांड ने तीर्थयात्रियों की होटल सुरक्षा, फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़ा सवाल
क्या तीर्थस्थलों के होटलों में फायर सेफ्टी नियमों की नियमित जांच और सख्ती से लागू करने की जरूरत है?
आप इस हादसे को लेकर क्या सोचते हैं? क्या होटल मालिकों और प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



