इंदौर। इन दिनों भाजपा के बड़े नेता इंदौर को लेकर बड़े चिन्तित हैं। उनका कहना है कि पार्टी में अब अनुशासन नाम की कोई चीज नजर ही नहीं आ रही। नई कार्यकारिणी बनी तो कालिख पुत गई। इसके बाद विवादों का सिलसिला चलता रहा। कोई महापौर सहित सारे पार्षदों को खुलेआम चोर ठहरा रहा है, ,तो कोई एमआईसी सदस्य को चूड़ियां भेंट कर रहा है।
गोलू समर्थक आसू व्यास ने सबको बता दिया चोर
भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक आसू व्यास ने महापौर और पार्षदों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें ‘चोर’ बताया है। उनके इस कथित बयान के बाद भाजपा की स्थानीय राजनीति में फिर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा के नेता कह रहे हैं कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो इतनी बड़ी पार्टी को संभालना मुश्किल हो जाएगा।
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कार्यकारिणी घोषित होते ही मचा था बवाल
नगर भाजपा की कार्यकारिणी घोषित होने के बाद पार्टी कार्यालय पर विरोध का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने संगठन के भीतर चल रही नाराजगी को सामने ला दिया। भाजपा के ही एक कार्यकर्ता ने कार्याकारिणी का विरोध करते हुए नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के नेम प्लेट पर कालिख पोती थी। वहां एकत्रित भाजपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर जलाए और जमकर नारेबाजी की थी।
एक्शन नहीं होने से बढ़ गए हौसले
यह ताज्जुब की बात है कि इस घटनाक्रम से जुड़े एक नेता मिश्राजी घर पहुंच गए और कालिख पोतने वाले ने माफी मांग ली। आपने राहत की सांस ली, लेकिन भाजपा के अधिकांश नेता और कार्यकर्ता इसके लिए सजा की उम्मीद लगाए बैठे थे। उनका अभी भी यह मानना है कि सजा नहीं देना आगे भारी पड़ेगा। इसका परिणाम हुआ कि कार्यकर्ताओं के हौसले और बुलंद होते गए।
पार्षद कमल वाघेला को भेंट कर दी थी चूड़ियां
महापौर परिषद के सदस्य कमल वाघेला को चूड़ियां भेंट किए जाने का मामला भी खासा चर्चा में रहा। राजनीतिक विरोध के इस तरीके ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को और सार्वजनिक कर दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि पहले इस तरह की हिम्मत किसी की नहीं होती थी।
चार नंबर में भी खुलेआम हो गई थी मारपीट
कुछ समय पहले विधानसभा चार में हुए विवाद से भाजपा की अंदरूनी कलह सड़क पर आ गई थी। विधायक मालिनी गौड़ के समर्थक और विधानसभा चार के प्रभारी वीरेंद्र शेडगे ने एक संघ के कार्यकर्ता से मारपीट कर दी थी। इसके बाद संघ के दबाव में शेडगे सहित मालिनी गौड़ समर्थक कई कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज हुआ था। इतना ही नहीं शेडगे को अपना पद भी छोड़ना पड़ा था।
सीएम के कार्यक्रमों पर भी दिख रहा असर
भाजपा में चल रही उठापटक का असर अब सीएम के कार्यक्रमों में भी दिख रहा है। कई बार ऐसा हो चुका है, जब भाजपा नेताओं ने सीएम के कार्यक्रमों से दूरी बनाई है। कभी किसी कार्यक्रम में आगे-पीछे बैठने को लेकर विवाद हो जाता है तो कभी कोई कोई और किसी वजह से मुंह फुला लेता है। रविवार को ही सीएम के कार्यक्रम में मंच पर कुर्सी नहीं मिलने से नाराज होकर प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे कार्यक्रम छोड़ बीच में ही चले गए थे। वहीं, इसी कार्यक्रम में एमसाईसी सदस्यों को तीसरी पंक्ति में बिठाने पर बवाल मच गया था।
आंखों पर पट्टी बांध मत बैठें
ऐसी घटनाओं की जब भी खबरें आती हैं, तो नेता कहते हैं कि विरोधी इसे मीडिया तक पहुंचा रहे हैं। यहां सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं लगातार हो रह हैं और सबके सामने हो रही हैं। जाहिर है मीडिया तक पहुंचेंगी ही। ऐसे में कार्यकर्ताओं को अपने नेताओं से ही सवाल करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं। अगर ऐसे ही अनुशासन टूटता रहा और संगठन का कोई भय नहीं रहा तो वह दिन भी आ सकता है जब नेता और कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ लें।



