बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने से 8 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 5-6 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
लखीसराय के सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) शिवम कुमार ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना सोमवार सुबह मंदिर परिसर के पास हुई। जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव के साथ भीड़ को नियंत्रित करने का काम शुरू किया।
👉 यह भी पढ़ें:
- Puri Rath Yatra : पुरी की रथ यात्रा में भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति, दो की मौत कई घायल
- शीतला माता मंदिर में दर्दनाक हादसा: भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत, कई घायल
- अल्लू अर्जुन समेत 24 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, पुष्पा 2 के स्पेशल स्क्रीनिंग के दौरान मची थी भगदड़
- पश्चिम बंगाल के बर्धमान रेलवे स्टेशन पर भगदड़, कई लोग घायल, पुल से उतरने के दौरान अफरातफरी में गिरते गए लोग
- करूर भगदड़ मामला: टीवीके जिला सचिव वीपी मथियालगन गिरफ्तार
- करूर भगदड़: अन्नामलाई ने डीएमके सरकार को ठहराया ज़िम्मेदार, सीबीआई जांच की मांग

लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने सदर अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उनके मुताबिक, मृतकों में सात महिलाएं शामिल हैं। मंदिर के बाहर अशोकधाम हॉल्ट रेलवे स्टेशन के सामने से श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी हुई थी। इसी दौरान स्टेशन पर दो ट्रेनें पहुंचीं।
बताया जा रहा है कि इसी बीच बिजली का खंभा गिरने की अफवाह फैल गई। हालांकि प्रशासन के अनुसार केवल बिजली का तार टूटने की बात सामने आई है। अफवाह के बाद भीड़ में अचानक दबाव बढ़ गया और महिलाओं की कतार में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े।
जानकारी के मुताबिक करीब 20-25 महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिर गईं, जिसके कारण कई लोग बेहोश हो गए। हादसे की बड़ी वजह अत्यधिक भीड़ और अचानक पैदा हुई अफरातफरी थी।
घटना के बाद प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बिहार सरकार ने हादसे पर गहरा दुख जताया है। मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। साथ ही घायलों के समुचित और त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
बड़ा सवाल
क्या धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन को पहले से बेहतर Crowd Management और Emergency व्यवस्था करनी चाहिए?
आपके मुताबिक इस दर्दनाक हादसे के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी किसकी बनती है—प्रशासन, मंदिर प्रबंधन या भीड़ नियंत्रण व्यवस्था? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



