West Bengal Politics,में ऐसी घटना सामने आई है जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा?
जानकारी के मुताबिक, विधानसभा चुनाव में झटका लगने के बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने संगठन को मजबूत करने और आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। लेकिन इस बैठक में सांसदों की बेहद कम मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया।
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बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के कुल 41 सांसदों में से केवल 5 सांसद ही बैठक में पहुंचे। लोकसभा में पार्टी के 29 सांसद हैं, जिनमें से एक सांसद का निधन हो चुका है। ऐसे में वर्तमान संख्या 28 होती है, लेकिन इनमें से भी केवल 3 सांसदों ने बैठक में हिस्सा लिया। वहीं राज्यसभा के 13 सांसदों में से सिर्फ 2 सांसद ही मौजूद रहे।
बैठक में इतनी कम उपस्थिति को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक सामान्य अनुपस्थिति है या फिर पार्टी के भीतर किसी बड़े असंतोष का संकेत, यह आने वाले दिनों में और साफ हो सकता है।
ममता बनर्जी लंबे समय से बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रही हैं और उनकी पार्टी राज्य में मजबूत स्थिति रखती है। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या पार्टी के कुछ नेता अब अलग राह तलाश रहे हैं या फिर यह केवल संयोग भर है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी महत्वपूर्ण बैठक में सांसदों की इतनी कम मौजूदगी के पीछे वास्तविक वजह क्या है? क्या यह संगठनात्मक व्यस्तता थी, राजनीतिक रणनीति थी या फिर पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी का संकेत?
आपकी क्या राय है? क्या यह TMC के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व संकट का संकेत है, या फिर विपक्ष इसे बेवजह बड़ा मुद्दा बना रहा है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।


