अमेरिकी कांग्रेस में पेश किए गए एक नए विधेयक ने एच-1बी वीजा प्रणाली में ऐसे बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है, जो अमेरिका में नौकरी और स्थायी निवास का सपना देखने वालों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
रिपब्लिकन सांसद Chip Roy ने “American White-Collar Worker Jobs Act” नामक विधेयक पेश किया है। उनका दावा है कि पिछले कई दशकों से एच-1बी वीजा प्रणाली का दुरुपयोग हो रहा है और अमेरिकी कंपनियां कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर घरेलू कर्मचारियों के अवसर कम कर रही हैं।
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ग्रीन कार्ड का रास्ता हो सकता है बंद?
विधेयक का सबसे चर्चित प्रस्ताव एच-1बी वीजा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड तक पहुंचने की प्रक्रिया को कठिन बनाना है। वर्तमान व्यवस्था में एच-1बी वीजा धारक अमेरिका में काम करते हुए स्थायी निवास (Green Card) के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन नए प्रस्ताव में “Dual Intent” नीति को समाप्त करने की बात कही गई है।
यदि यह बदलाव लागू होता है, तो वीजा धारकों को यह साबित करना पड़ सकता है कि उनका अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का इरादा नहीं है। ऐसे में हजारों भारतीय पेशेवरों के लंबे समय से चले आ रहे ग्रीन कार्ड सपनों को बड़ा झटका लग सकता है।
H-1B वीजा अवधि 6 साल से घटाकर 2 साल?
विधेयक में एच-1बी वीजा की अधिकतम अवधि को मौजूदा छह साल से घटाकर सिर्फ दो साल करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा, वर्तमान लॉटरी सिस्टम की जगह उन कंपनियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है जो अधिक वेतन देने को तैयार हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका में रोजगार के अवसरों की प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है, खासकर उन पेशेवरों के लिए जो करियर की शुरुआत कर रहे हैं।
भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है असर
विदेशी छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता OPT (Optional Practical Training) कार्यक्रम को लेकर है। यह कार्यक्रम पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को अमेरिका में सीमित अवधि तक काम करने की अनुमति देता है। नए प्रस्ताव में इस कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग की गई है।
यदि ऐसा होता है, तो अमेरिका में पढ़ाई करने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए नौकरी पाने और कार्य अनुभव हासिल करने का महत्वपूर्ण रास्ता बंद हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति से जुड़ रही कड़ी?
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिकी प्रशासन पहले से ही कानूनी इमिग्रेशन कार्यक्रमों को लेकर सख्त रुख अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। एच-1बी याचिकाओं की फीस बढ़ाने और पात्रता नियमों को कड़ा करने जैसे मुद्दे पहले से चर्चा में हैं। ऐसे में यह नया विधेयक अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में संभावित बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
हालांकि फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित विधेयक है। इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की विभिन्न प्रक्रियाओं और मंजूरियों से गुजरना होगा। फिर भी इसने भारतीय आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों और छात्रों के बीच चिंता और बहस को तेज कर दिया है।
क्या अमेरिका अब विदेशी प्रतिभाओं के लिए अपने दरवाजे धीरे-धीरे बंद कर रहा है, या यह सिर्फ अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम है?
आपकी राय में H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड नियमों में प्रस्तावित बदलाव भारतीय युवाओं के भविष्य को कितना प्रभावित करेंगे? क्या भारतीय छात्रों और आईटी पेशेवरों को अब दूसरे देशों की ओर रुख करना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।



