नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कहा, “देर आए दुरुस्त आए।” साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर जल्द ही समय के अनुरूप फैसला लेंगे।
मुरली मनोहर जोशी ने अपनी पोस्ट में छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपना आंदोलन शांतिपूर्वक समाप्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब देश के शिक्षा जगत में जल्द शांति स्थापित होगी और छात्रों को अपने उज्ज्वल भविष्य तथा प्रगति के लिए व्यापक अवसर मिलेंगे।
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मुरली मनोहर जोशी खुद केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में उच्च शिक्षा भी इसी मंत्रालय के अधीन आती थी। शिक्षा क्षेत्र से उनके लंबे जुड़ाव को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर उनकी टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे पहले भी मुरली मनोहर जोशी ने दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि छात्रों को कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन करते देखना बेहद दुखद है।
उन्होंने छात्रों की परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को जायज बताते हुए कहा था कि इन समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता के साथ निकाला जाना चाहिए। उनके बयान के बाद अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आई ताजा प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
छात्रों की परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर देशभर में लंबे समय से बहस चल रही है। ऐसे में अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और शिक्षा व्यवस्था में संभावित सुधारों पर है।
आपका क्या मानना है? क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की उम्मीद की जानी चाहिए? क्या मुरली मनोहर जोशी की प्रधानमंत्री से जल्द फैसला लेने की अपील उचित है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं और इस खबर को शेयर करके अपनी प्रतिक्रिया दूसरों तक भी पहुंचाएं।



