नई दिल्ली। भारत की युवा स्क्वैश स्टार अनाहत सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करते हुए इतिहास रच दिया है। अनाहत ने जूनियर स्क्वैश विश्व चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
कनाडा में आयोजित टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में अनाहत सिंह का सामना मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकय्या सालेम से हुआ। भारतीय खिलाड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में रुकय्या को सीधे तीन गेम में 11-3, 11-7, 11-9 से हराकर विश्व खिताब पर कब्जा जमाया।
अनाहत की यह जीत इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि 21 साल के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाई और खिताब भी अपने नाम किया। इससे पहले साल 2005 में भारत की दिग्गज स्क्वैश खिलाड़ी जोशना चिनप्पा इस टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंची थीं।
अनाहत ने अब जोशना चिनप्पा के बाद फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने के साथ-साथ भारत के लिए खिताब जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय स्क्वैश के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

फाइनल मुकाबले में अनाहत ने शुरुआत से ही आक्रामक और आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया। उन्होंने पहला गेम आसानी से 11-3 से अपने नाम किया। दूसरे गेम में भी भारतीय खिलाड़ी ने अपनी लय बरकरार रखी और 11-7 से जीत दर्ज की। तीसरे और निर्णायक गेम में रुकय्या ने वापसी की कोशिश की, लेकिन अनाहत ने दबाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 11-9 से गेम जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
अनाहत की ऐतिहासिक जीत के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी उन्हें बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फाइनल के अंतिम पलों का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि अनाहत सिंह का यह प्रदर्शन इतिहास रचने वाला है और जूनियर विश्व स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर उन्हें हार्दिक बधाई।
अनाहत सिंह की इस उपलब्धि ने भारतीय स्क्वैश के भविष्य को लेकर उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। युवा खिलाड़ी की यह ऐतिहासिक सफलता देश के हजारों उभरते खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
आपकी क्या राय है? क्या अनाहत सिंह की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय स्क्वैश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएगी? क्या आने वाले समय में अनाहत सीनियर स्तर पर भी भारत के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब जीत सकती हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं और अनाहत को बधाई देना न भूलें!



