पुष्प विहार कॉलोनी में भूमाफियाओं का खेल फिर शुरू, अब प्लॉट धारक समूह को किया आगे

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इंदौर। इंदौर की देवी अहिल्या श्रमिक कामगार संस्था की कॉलोनी पुष्प विहार में भूमाफियाओं ने फिर से खेल शुरू कर दिया है। अब भूमाफियाओं ने कुछ रहवासियों द्वारा बनाई गई संस्था प्लॉट धारक समूह को आगे किया है। इस संस्था के महासचिव एनके मिश्रा खुद ही विवादों में रहे हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से कई मांगें की हैं।

आखिर कौन बना रहा अवैध मकान

सूत्र बताते हैं कि जिस एनके मिश्रा ने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस की है, उन पर आरोप है कि वे कॉलोनी में अवैध मकान बनवा रहे हैं। पहले भी उन पर भूमाफियाओं के हाथों खेलने के आरोप लगे थे। अब वे एक नई संस्था बनाकर उसके माध्यम से सरकारी विभागों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रशासन को देखना चाहिए, मामले के पीछे कौन

प्रशासन को इस मामले में देखना चाहिए कि इस मामले के पीछे कौन लोग हैं। किनके कहने पर मिश्रा यह मुद्दा उठा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे मामले में देवी अहिल्या संस्था कहां है? संस्था खुद आगे क्यों नहीं आ रही?

नसीम हैदर के प्लॉटों का क्या हुआ

यहां बड़ा सवाल यह है कि जिस संगठन के बूते मिश्रा सरकार से मांगें कर रहे हैं, उसकी पात्रता क्या है? इन्हीं लोगों पर अवैध तरीके से मकान बनने के आरोप लग रहे हैं। प्रशासन को यह भी देखना चाहिए कि नसीम हैदर के प्लॉटों का क्या हुआ। उसने गलत तरीके से रजिस्ट्री कर दी थी। तत्कालीन कलेक्टर ने उस पर एक्शन लिया था।

ताजा स्थिति की जांच कराना जरूरी

प्रशासन को पुष्प विहार की ताजा स्थिति की जांच कराना जरूरी है। आखिर वहां अवैध मकान कैसे बनते जा रहे हैं? आखिर इनके पीछे किसका हाथ है? नगर निगम भी इस मामले मे चुप्पी साधे बैठा है। तत्कालीन कलेक्टर ने बोर्ड का चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन मिश्राजी ने तब कहा था कि वे बोर्ड में नहीं जाएगे। फिर कहां से प्रकट हो गए?

अब 13 संस्थाओं की बात करने लगे

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस संगठन को पात्रता ही नहीं है, वह अब 13 संस्थाओं की बात करने लगे हैं। यह पता लगाना जरूरी है कि आखिर इसके पीछे कौन भूमाफिया है और वह कौन से प्लॉट क्लियर कराना चाहता है।

प्लॉट धारक समूह की 13 प्वाइंट की मांगें

1.इंदौर विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1993 में खजराना इंदौर के इस क्षेत्र में स्कीम नंबर 132 लागू की थी। जिसमें 13 सहकारी संस्थाओं के लगभग 6000 सदस्यों के भूखंड व 200 के लगभग व्यक्तियों की स्वयं की भूमि प्रभावित हुई थीं ।

2. प्राधिकरण द्वारा समय सीमा में योजना 132 में विकास कार्य नहीं करने से, माननीय हाई कोर्ट ने अपने आदेश से उसे निरस्त कर दिया था। इसके पश्चात इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2009 में उस क्षेत्र में स्कीम नंबर 171 लागू कर दी गयी थी। इसमें भी अब तक तक कोई विकास कार्य नहीं किया गया।

3. इस प्रकार प्राधिकरण द्वारा स्कीम लागू करने के 33 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात भी इंदौर विकास प्राधिकरण ने ना तो एक इंच जमीन का अधिग्रहण किया न ही किसी प्रकार का विकास कार्य किया, और न ही उसे मुक्त किया। सीनियर सिटीजन के जीवन के अमूल्य वर्ष बेवजह नष्ट कर दिए गए ।

4. प्राधिकरण की स्कीम लागू होने के कारण प्लाट धारक अपने प्लाटों पर मकान नहीं बना पाए क्योंकि नक्शे ही पास नहीं हो पा रहे थे।

5. इस स्थिति का लाभ उठा कर असामाजिक तत्वों ने विभिन्न संस्थाओं के प्लॉट्स पर अवैध कब्जा कर मकान बनाकर विक्रय कर दिए। इस अतिक्रमण से प्रभावित सदस्य न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

6. कई सदस्य तो इस अवधि में अपने प्लाट का सपना देखते-देखते स्वर्ग सिधार गए हैं।

7. राज्य शासन ने प्राधिकरण की इस मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए 17-2-2020 को विधान में संशोधन कर वेबजह लंबित योजनाओं की मुक्ति के प्रावधान लाकर, समस्या के निराकरण का प्रयास किया, किन्तु इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा संशोधित विधान के प्रावधान के तहत योजना की मुक्ति के स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद लगभग 4 वर्ष के विलम्ब के बाद दिनांक 23-10-24 को योजना 171 की मुक्ति हेतु देय प्रतिफल राशि की विज्ञप्ति समाचार पत्रों में जारी की। जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि प्राधिकरण द्वारा इन स्कीमों पर किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति होने पर स्कीम व्यपगत हो जावेगी।

8. प्राधिकरण द्वारा मांगी गई धनराशि जो रुपए 5 करोड़ 84 लाख तथा उसे पर जीएसटी की राशि भी 13 संस्थाओं तथा विभिन्न भूमि स्वामियों द्वारा 22 दिसंबर 2024 समयावधि में (जो इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा नियत दिनांक थी) को जमा कर दी गई थी।

9. धनराशि जमा करने के पश्चात व्यतीत 18 माह के बाद भी प्राधिकरण द्वारा स्कीम से मुक्त करने हेतु कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस प्रकार वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर मनमर्जी के संकल्प पारित कर योजना 171 को लटकाने का, विलम्ब कारित करने का प्रयास लगातार किया जाता रहा है। गुड गवर्नेंस की सरकार में अधिकारियों के इस रवैये से हम सब हतप्रभ हैं।

10. आश्चर्य की बात तो यह है कि प्राधिकरण द्वारा इतनी लापरवाही करने के पश्चात भी शासन प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्राधिकरण से इस बारे में कोई स्पष्टीकरण अभी तक नहीं मांगा गया है।

11. हमारा शासन प्रशासन से यही विनम्र अनुरोध है की इस विषय में अविलंब उचित निर्णय लिया जाए जिससे सदस्यों में फैली निराशा व असंतोष को दूर किया जा सके।

12. अनिर्णय की अवस्था में करीब 6000 सदस्यों ने अपने परिवारों के साथ शीघ्र ही जन आंदोलन करने का निर्णय लिया है।

13. हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री अति शीघ्र इस समस्या का निराकरण कर उपकृत करेंगें। जैसा कि उन्होंने सार्वजनिक मंच से इस समस्या के निराकरण की घोषणा भी की थी।

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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