पुष्प विहार कॉलोनी के प्लॉट धारकों को फिर उलझाने की तैयारी, जिस संस्था के लेटर हेड पर आईडीए में लगी है आपत्ति, वह अस्तित्व में है ही नहीं

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इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा योजना क्रमांक 171 को लेकर बोर्ड बैठक में जो फैसला लिया गया है, उससे पुष्प विहार सहित कई कॉलोनियों को प्लॉट मिलने का इंतजार खत्म होने वाला है। आईडीए ने इसमें गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनों को मुक्त रखने का फैसला लिया है, जिस पर पुष्प विहार कॉलोनी प्लॉट धारक समूह ने आपत्ति जताई है। विडंबना यह कि इस तरह की कोई संस्था अब अस्तित्व में है ही नहीं।

आईडीए में जिस पुष्प विहार कॉलोनी प्लॉट धारक समूह के लेटर हेड पर आपत्ति जताई है, उसमें मुख्य संरक्षक पीसी दीक्षित का नाम है, जिनका निधन हो चुका है। इसके लेटर हेड पर एमके चतुर्वेदी को संस्था का अध्यक्ष बताया गया है, जो करीब दो वर्ष पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। अब सवाल यह है कि पुष्प विहार कॉलोनी के प्लॉटधारकों के नाम पर आखिर कौन अपना हित साधना चाहता है। चतुर्वेदी के इस्तीफे के बाद महासचिव रहे एनके मिश्रा के अलावा फिलहाल कोई सक्रिय नजर नहीं आ रहा।

आखिर किसके हित में लगाई है आपत्ति

अस्तित्वहीन पुष्प विहार कॉलोनी प्लॉटधारक समूह के लेटर हेड पर प्राधिकरण अध्यक्ष और संभागायुक्त दीपक सिंह को दो पेज का पत्र सौंपा गया है। इसमें बोर्ड मीटिंग में लिए फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है। इस समूह के कथित महासचिव एनके मिश्रा का दो टूक कहना है कि योजना 171 के लिए प्राधिकरण ने देय प्रतिफल की पूरी राशि संशोधित विधान की धारा 50 (ख) के तहत जमा करवा ली है, तो योजना ही स्वत: समाप्त हो गई और प्रदेश शासन के गजट नोटिफिकेशन में भी नियम 23 के तहत इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है। बावजूद इसके योजना को लटकाने के उद्देश्य से मोडिफिकेशन करने का विधि विरुद्ध और अव्यावहारिक निर्णय किया गया। इसकी मंजूरी शासन भी नहीं देगा, क्योंकि धारा 52 के तहत उन्हीं योजनाओं में मोडिफिकेशन के निर्देश देने की व्यवस्था है, जो वर्तमान में चल रही है।

पहले भी विवादों में रहे हैं मिश्रा

बताया जाता है कि अस्तित्वहीन संस्था के कथित महासचिव एनके मिश्रा पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं। कहा जाता है कि भूमाफियाओं और सहकारी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने के कारण ही उनकी पूर्व संस्था में ही विरोध होता रहा है। अभी जो आपत्ति आईडीए में उन्होंने लगाई है, उसको लेकर भी प्लॉट धारक भ्रमित हैं। प्लॉट धारकों की चिन्ता यह है कि अगर फिर से कहीं मामला उलझ गया तो वे कहीं के नहीं रहेंगे। असली प्लॉटधारक यह सोच रहे हैं कि आखिर मिश्राजी ने किसके हित में यह आपत्ति लगाई है।

आईडीए ने कोई गलत निर्णय नहीं लिया

सूत्र बताते हैं कि आईडीए ने नियमानुसार कोई गलत निर्णय नही लिया है। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 17 फरवरी 2020 के अनुसार जहां अधोसंरचना विकास कार्य प्रारम्भ किया गया था और अधिनियम में संशोधन की तारीख को गणना करने पर 10 प्रतिशत तक व्यय उपगत किया गया है और भूमि स्वामी द्वारा स्कीम पर उपगत किए गए व्यय का विकास प्राधिकरण को प्रतिपूर्ति कर दी गई है तो जैसा कि विहित किया जाए योजना व्यपगत हो जाएगी। लेकिन, छह महीने से अनधिक समय में, विकास प्राधिकरण नवीन विकास योजना तैयार कर सकता है, जैसा कि विहित किया जाए। ऐसे समय तक संचालक, योजना क्षेत्र के सभी विकास कार्यों को प्रतिषिध करेंगे, जिससे कि स्कीम की व्यवहार्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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