West Bengal News: पश्चिम बंगाल में बारुईपुर (Baruipur) की 11 वर्षीय बच्ची की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस घटना को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने आ गई हैं। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पीड़ित परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और बैरिकेड्स लगाए गए।
टीएमसी नेताओं के अनुसार, कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस वाहन खड़े किए गए थे। पार्टी का दावा है कि पास में स्थित अभिषेक बनर्जी के घर के आसपास भी पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई थी।
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टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर जाने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।
टीएमसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी की मांग सिर्फ एक है—पीड़ित बच्ची को न्याय मिले। पार्टी ने दावा किया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद ममता बनर्जी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वहीं, टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का रास्ता रोकने के उद्देश्य से जानबूझकर पुलिस की गाड़ियां तैनात की गईं।
पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब बारुईपुर के सूर्यपुर हाट इलाके में लापता 11 वर्षीय बच्ची का शव एक बोरे में बरामद हुआ। इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया, टायर जलाए और कुछ पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ भी की। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की।
इस मामले में पुलिस जांच जारी है। घटना से जुड़े आरोपों और राजनीतिक दावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मामले के तथ्यों और जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।
अब आपकी राय क्या है?
क्या ऐसे संवेदनशील आपराधिक मामलों को राजनीतिक विवाद बनने से बचाया जाना चाहिए, या जनप्रतिनिधियों को पीड़ित परिवार से मिलने और अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।



