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बेंगलुरु। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने एक बार फिर आरएसएस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि संघ देश के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दायर कानूनी मामले संगठन के बारे में उनकी ओर से उठाए गए सवालों की प्रतिक्रिया हैं।
प्रियांक ने एक्स पर एक अखबार का लेख शेयर किया है। इसमें बताया गया था कि एक आरएसएस सदस्य की ओर से दायर मानहानि की शिकायत के मामले में एक विशेष अदालत ने उन्हें और राज्य के साथी मंत्री दिनेश गुंडू राव को नोटिस जारी किया है। अपने पोस्ट में प्रियांक ने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संगठन अपने स्वयंसेवकों के चंदे से चलता है। इस दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि कुछ चुनिंदा लोगों का समूह अपने कठपुतलियों का इस्तेमाल करके हमारे खिलाफ मामले दर्ज करवा रहा है, सिर्फ इसलिए कि हम आरएसएस पर जायज सवाल उठा रहे हैं।
आरएसएस को मिलने वाले दान पर सवाल
खड़गे ने कहा कि मोहन भागवत ने कहा है कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों के दिए गए दान से चलता है। हालांकि, इस दावे के संबंध में कई जायज सवाल उठते हैं। ये स्वयंसेवक कौन हैं और इनकी पहचान कैसे होती है? दिए गए दान का पैमाना और स्वरूप क्या है? ये दान किन तरीकों या माध्यमों से प्राप्त होते हैं? खड़गे ने कहा कि आरएसएस पारदर्शी तरीके से काम करता है, तो दान सीधे संगठन को उसकी अपनी पंजीकृत पहचान के तहत क्यों नहीं दिया जाता?
आरएसएस अभी भी पंजीकृत क्यों नहीं
कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा कि जब स्वयंसेवक स्थानीय कार्यालयों से वर्दी या अन्य सामग्री खरीदते हैं, तो इन निधियों का हिसाब कहां रखा जाता है? स्थानीय कार्यालयों और अन्य बुनियादी ढांचे के रखरखाव का खर्च कौन उठाता है? ये प्रश्न पारदर्शिता और जवाबदेही के मूलभूत मुद्दे को उजागर करते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर इतनी व्यापक उपस्थिति और प्रभाव के बावजूद आरएसएस अभी भी पंजीकृत क्यों नहीं है? जब भारत में प्रत्येक धार्मिक या धर्मार्थ संस्था के लिए वित्तीय पारदर्शिता अनिवार्य है, तो आरएसएस के लिए ऐसी जवाबदेही व्यवस्था का अभाव किस आधार पर उचित है?



