नई दिल्ली: कर्नाटक में कथित पुलिस भर्ती घोटाले और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा से जुड़े मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता और सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल संसद के मानसून सत्र को बाधित कर रहे हैं, जबकि जिन मुद्दों पर वे दूसरे राज्यों में सरकारों से जवाब मांगते हैं, उन्हीं मामलों पर कांग्रेस शासित राज्यों में अलग रवैया अपनाते हैं।
भाजपा की ओर से कर्नाटक में कथित पुलिस कांस्टेबल भर्ती अनियमितताओं और JPSC परीक्षा को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। संबित पात्रा ने इस दौरान कांग्रेस पर “दोहरे मानदंड” अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है।
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‘मानसून सत्र में प्रश्नकाल और विधेयकों पर चर्चा नहीं’
संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसद के मानसून सत्र का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि संसद के एक सत्र पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन सत्र शुरू होने के बाद प्रश्नकाल और विधेयकों पर चर्चा प्रभावित हुई है।
उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि यदि विपक्ष सरकार से जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगना चाहता है, तो उसे संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेकर उन मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।
पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में समान परिस्थितियों को लेकर अलग राजनीतिक रुख अपनाती है। उन्होंने इसे पार्टी के कथित “दोहरे चरित्र” से जोड़ते हुए कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा।

कर्नाटक पुलिस भर्ती मामले को लेकर प्रियंक खरगे पर हमला
भाजपा नेता ने कर्नाटक में पुलिस कांस्टेबल भर्ती से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने राज्य सरकार और मंत्री प्रियंक खरगे को निशाने पर लेते हुए एक कथित बयान का हवाला दिया।
पात्रा ने आरोप लगाया कि भर्ती से जुड़े प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर प्रियंक खरगे की प्रतिक्रिया संवेदनहीन थी। भाजपा नेता के मुताबिक, छात्रों के आंदोलन और इस्तीफे की मांग को लेकर दिए गए कथित बयान से सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं।
भाजपा का आरोप है कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में छात्रों या अभ्यर्थियों की शिकायतें सामने आती हैं तो सरकार को उनकी बात सुनकर पारदर्शी तरीके से जांच करानी चाहिए।
‘मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी क्यों चुप?’
संबित पात्रा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने कर्नाटक के मामले में उसी तरह प्रतिक्रिया नहीं दी, जैसी प्रतिक्रिया वह दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर देती है।
पात्रा ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में कई मुद्दों पर विस्तार से बात की, लेकिन कर्नाटक में उनके बेटे प्रियंक खरगे से जुड़े विवाद पर कांग्रेस की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दे रही है।
भाजपा नेता ने इसे कांग्रेस के कथित दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।
JPSC परीक्षा को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना
संबित पात्रा ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा से जुड़े विवाद को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया। उन्होंने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए अपनी समस्याओं को उठा रहे हैं।
पात्रा का आरोप था कि कांग्रेस इस आंदोलन को लेकर उतनी सक्रिय नहीं दिखाई दे रही है, जितनी सक्रियता वह दूसरे राज्यों में छात्रों और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर दिखाती है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी कांग्रेस सांसद ने JPSC परीक्षा को लेकर संसद में प्रदर्शन किया या हाथ में कोई तख्ती लेकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया?
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर “सुविधाजनक आक्रोश” की राजनीति करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, कांग्रेस जिस मुद्दे को राजनीतिक रूप से अपने लिए लाभदायक समझती है, उसी पर ज्यादा मुखर होती है।
JPSC विवाद में छात्रों की मांगें क्यों अहम?
प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों का सीधा असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। परीक्षा प्रक्रिया, परिणाम, पारदर्शिता, पेपर लीक या भर्ती से जुड़ी किसी भी शिकायत पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना जरूरी होता है।
ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ परीक्षा एजेंसी और संबंधित सरकार की ओर से आधिकारिक जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है। छात्रों को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि शिकायतों की जांच कैसे होगी, परीक्षा प्रक्रिया में क्या सुधार किए जाएंगे और यदि कोई अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी।
कर्नाटक पुलिस भर्ती और JPSC परीक्षा के मुद्दे को लेकर भाजपा ने अब कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से इन आरोपों का जवाब और संबंधित मामलों पर उसका आधिकारिक पक्ष इस विवाद की अगली दिशा तय कर सकता है।
संसद से लेकर राज्यों तक गरमाई राजनीति
कर्नाटक पुलिस भर्ती और JPSC परीक्षा के मुद्दे ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को अपने राज्यों में उठ रहे भर्ती और परीक्षा संबंधी सवालों पर भी उसी तरह जवाबदेही दिखानी चाहिए, जैसी मांग वह केंद्र या भाजपा शासित राज्यों से करती है।
वहीं, पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर छात्रों की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई कब होगी। भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता का मुद्दा लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है।
आपकी राय क्या है? क्या कर्नाटक पुलिस भर्ती और JPSC जैसे परीक्षा एवं भर्ती से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों को एक समान रवैया अपनाना चाहिए? क्या संसद में इन मामलों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, या आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सरकारों को सीधे छात्रों की शिकायतों का समाधान करना चाहिए?
क्या आपको लगता है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को मिलकर एक समान नीति बनानी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



