अहमदाबाद: Commonwealth Games 2026 का Glasgow में समापन हो गया है और अब दुनिया की नजर भारत पर है। 2030 Commonwealth Games की मेजबानी Ahmedabad को मिलने के साथ भारत के सामने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय sporting event के आयोजन की तैयारी का रास्ता खुल गया है। Glasgow में हुए समापन समारोह के दौरान Commonwealth Games का flag भारत को सौंपा गया और भारत की ओर से Indian Olympic Association की अध्यक्ष PT Usha तथा Neeraj Chopra ने इसे ग्रहण किया।
भारत के लिए यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि 2030 Commonwealth Games इस प्रतियोगिता के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर का आयोजन होगा। Glasgow 2026 में सीमित बजट और कम खेलों के साथ एक छोटा संस्करण आयोजित किया गया था। इसके विपरीत Ahmedabad 2030 में Commonwealth Sport ने 15 से 17 खेलों के आयोजन की संभावना जताई है।
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Glasgow Games के दौरान करीब 3,000 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और 11 दिनों के आयोजन में लगभग 4.34 लाख दर्शक पहुंचे। मौजूदा Commonwealth Games की आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए Glasgow ने कम लागत, मौजूदा infrastructure और कम खेलों पर आधारित मॉडल अपनाया। Reuters के मुताबिक Glasgow आयोजन पिछली बार शहर में हुए 2014 Commonwealth Games की लागत के लगभग एक-तिहाई में आयोजित किया गया।
अब भारत के सामने चुनौती केवल भव्य आयोजन करने की नहीं, बल्कि ऐसा आयोजन करने की है जो आर्थिक रूप से टिकाऊ, पारदर्शी और खेलों के लिहाज से लंबे समय तक उपयोगी साबित हो। भारत पहले भी 2010 में Commonwealth Games की मेजबानी कर चुका है। इसलिए 2030 का आयोजन देश के लिए अपनी आयोजन क्षमता को नए स्तर पर दिखाने का मौका होगा।
गुजरात सरकार और Commonwealth Sport की ओर से 2030 आयोजन को भारत के global sporting ambitions से भी जोड़ा जा रहा है। Gujarat के उपमुख्यमंत्री Harsh Sanghavi ने Glasgow में कहा कि Commonwealth Games भारत के 2036 Olympic और Paralympic Games की मेजबानी की तैयारी दिखाने का अवसर हो सकता है।
भारत के खेल प्रेमियों के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि 2030 तक देश में खेल infrastructure, training facilities और युवा खिलाड़ियों के लिए अवसर बढ़ाने का मौका मिलेगा। यदि Commonwealth Games के लिए तैयार की जाने वाली सुविधाओं का इस्तेमाल बाद में national और international competitions के लिए भी किया जाता है, तो आयोजन का फायदा लंबे समय तक मिल सकता है।
लेकिन जनता की नजर खर्च और transparency पर भी रहेगी। बड़े sports events में infrastructure development, आयोजन लागत, टिकट व्यवस्था, transport, accommodation और security जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश होता है। इसलिए Ahmedabad 2030 के लिए सबसे बड़ी कसौटी यही होगी कि आयोजन भव्य होने के साथ-साथ जवाबदेह और उपयोगी भी हो।
Glasgow की सीख भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। कम समय और सीमित resources के बावजूद Glasgow ने existing venues का इस्तेमाल करके Games आयोजित किए। भारत के लिए यह मौका है कि वह Ahmedabad की मौजूदा सुविधाओं को बेहतर बनाते हुए अनावश्यक खर्च से बचे और ऐसी sporting legacy तैयार करे जिसका लाभ खिलाड़ियों और आम जनता को लंबे समय तक मिले।
अब 2030 तक चार साल का समय है। तैयारियां जितनी जल्दी शुरू होंगी, उतना ही बेहतर planning, infrastructure और खेल प्रतिभाओं के विकास पर ध्यान दिया जा सकेगा। भारत के लिए यह सिर्फ Commonwealth Games नहीं, बल्कि दुनिया के सामने अपनी sporting ambitions और आयोजन क्षमता दिखाने का बड़ा मंच भी बन सकता है।
क्या आपको लगता है कि Ahmedabad 2030 Commonwealth Games भारत के खेल ढांचे को नई दिशा दे सकता है? और इस आयोजन में सरकार को सबसे ज्यादा ध्यान खिलाड़ियों, infrastructure या खर्च की पारदर्शिता में से किस पर देना चाहिए? कमेंट करके अपनी राय जरूर दें।



