पश्चिम बंगाल में पहली बार बनी भाजपा सरकार ने सत्ता संभालते ही तेजी से फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों के भीतर प्रशासन और कानून-व्यवस्था को लेकर एक दर्जन से अधिक अहम निर्देश जारी कर दिए। इन फैसलों ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले धार्मिक स्थलों पर लगाए जाने वाले लाउडस्पीकरों की आवाज को नियंत्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल से निकलने वाली ध्वनि उस परिसर से बाहर नहीं जानी चाहिए और विशेष मौकों पर सार्वजनिक रास्ते बंद कर लोगों को असुविधा पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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सूत्रों के मुताबिक, नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय में पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बैठक में सुवेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि कानून सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी भी तरह का पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा के 1300 से अधिक मामलों की फिर से जांच कराने का भी आदेश दिया है। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि चुनावी हिंसा, गुंडागर्दी और जबरन वसूली से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाए और दोषियों को गिरफ्तार किया जाए।
इसके अलावा उन्होंने अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों का आपराधिक इतिहास रहा है, उनकी सुरक्षा तुरंत वापस ली जाए।
महिलाओं और युवाओं को लेकर भी सरकार ने बड़े फैसले लिए हैं। सरकारी नौकरियों में अधिकतम आयु सीमा 40 से बढ़ाकर 45 वर्ष कर दी गई है। वहीं 1 जून से महिलाओं के लिए निजी बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा भी कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कोयला, रेत और पत्थरों के अवैध खनन के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने का ऐलान किया। साथ ही पशु तस्करी रोकने और सभी अवैध बूचड़खानों को बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
महिलाओं से जुड़े अपराधों पर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। दुष्कर्म, दुष्कर्म के प्रयास और छेड़छाड़ के पुराने मामलों को फिर से खोलने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।
सांप्रदायिक हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं हेलमेट नियमों का सख्ती से पालन कराने, अवैध टोल वसूली रोकने और आम जनता को कम से कम असुविधा देने के लिए पुलिस को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इन फैसलों को राज्य में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह बदलने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।



