भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम-मंडल-प्राधिकरण में नियुक्तिों का सिलसिला जारी है। इसी बीच सियासी गलियारों में एक नाम की खूब चर्चा हो रही है, वह है पूर्व सांसद डॉ.केपी यादव का नाम। डॉ. केपी यादव को मध्यप्रदेश स्टेट सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड में संचालक नियुक्त किया गया है। लोग इसे मध्यप्रदेश भाजपा में सत्ता संतुलन बनाने का मोहन मैजिक बता रहे हैं।
भाजपा के टिकट पर सिंधिया को दी थी शिकस्त
उल्लेखनीय है कि डॉ.केपी यादव ने 2019 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को गुना लोकसभा से भाजपा के टिकट पर चुनाव में हराया था। इसके बाद सिंधिया ने कांग्रेस की सरकार गिरा कर मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनवा दी थी। इसके बाद सिंधिया राज्यसभा सांसद चुने गए।
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सिंधिया के कारण कट गया था गुना से टिकट
2024 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को गुना से टिकट देने के चक्कर में केपी यादव का टिकट काट दिया गया था। तब चुनाव प्रचार के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने मंच से डॉक्टर केपी यादव को लेकर कहा था कि वह उनकी राजनीतिक भविष्य की चिंता करेंगे। तब से केपी यादव के समर्थक उनके कहीं एडजस्ट होने का इंतजार कर रहे थे।
सिंधिया से बना रहा छत्तीस का आंकड़ा
सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद भी केपी यादव से उनका छत्तीस का आंकड़ा बना रहा। केपी यादव क्षेत्र में सक्रिय रहे, लेकिन सिंधिया के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रहे। हालांकि जब भी सीएम डॉ.मोहन यादव के उस क्षेत्र में कार्यक्रम होते तो केपी यादव सक्रिय हो जाते। तब से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम हो गई थी कि केपी यादव के लिए कुछ बड़ा सोचा जा रहा है।
केपी यादव के साथ रावत को भी मिला स्थान
केपी यादव की नियुक्ति को सिंधिया के गढ़ में सत्ता संतुलन बनाने की कोशिश मानी जा रही है। ग्वालियर-चंबल संभाग से जिन नेताओं को नियुक्ति हुई है, उसमें सिंधिया के विरोधियों को भी जगह देकर भाजपा ने यह बताने की कोशिश की है कि वह संतुलन बनाए रखेगी। यही वजह है कि केपी यादव के अलावा कांग्रेस से भाजपा में आए रामनिवास रावत को भी वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। केपी यादव के साथ ही रावत भी सिंधिया विरोधी माने जाते हैं। भाजपा नेता इसे सिंधिया समर्थकों और उनके विरोधियों के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश करार दे रहे हैं। इन नियुक्तियों से भाजपा संगठन ने यह साफ जाहिर कर दिया है कि ग्वालियर-चंबल की राजनीति में सिंधिया का महत्व है, लेकिन संगठन सर्वोपरि है।



