मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। चर्चा है कि शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) आने वाले समय में NDA (National Democratic Alliance) के साथ नजदीकी बढ़ा सकती है। इसी बीच सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बीजेपी (BJP) ने इस संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर एक रणनीति तैयार की है।
हालांकि, अभी तक शरद पवार या NCP-SP की ओर से NDA में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक अटकलों और सूत्रों के दावों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
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BJP का क्या है कथित प्लान?
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अगर NCP-SP को NDA के साथ औपचारिक रूप से जोड़ना है, तो पहले एनसीपी के दोनों विरोधी गुटों के बीच सुलह और संभावित एकीकरण जरूरी होगा।
बताया जा रहा है कि बीजेपी की प्राथमिकता यह है कि एनसीपी के दोनों गुट पहले अपने मतभेदों को सुलझाएं और एक राजनीतिक मंच पर वापस आएं। सूत्रों का यह भी दावा है कि बीजेपी की फिलहाल ऐसी कोई विशेष इच्छा नहीं है कि केवल शरद पवार या उनके करीबी नेताओं को अलग से NDA में शामिल किया जाए।
अगर यह राजनीतिक समीकरण वास्तव में आगे बढ़ता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, अभी इस संभावित गठजोड़ को लेकर कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
अजित पवार गुट की भी अपनी मांग
दूसरी ओर, महाराष्ट्र में बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ सरकार में शामिल NCP भी अपनी राजनीतिक उम्मीदों को लेकर सक्रिय नजर आ रही है।
पार्टी की ओर से कहा गया कि उसके कार्यकर्ता चाहते हैं कि अप्रैल में राज्यसभा सांसद बने पार्थ पवार को भविष्य में होने वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में जगह दी जाए।
पार्थ पवार को केंद्र में मंत्री बनाए जाने की मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब महाराष्ट्र की सियासत में एनसीपी के दोनों गुटों के बीच संभावित नजदीकी और राजनीतिक पुनर्गठन की चर्चाएं चल रही हैं।
परिसीमन और संसद के मानसून सत्र से भी जुड़ा है मामला?
इन राजनीतिक अटकलों के बीच संसद का मानसून सत्र भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खबरों के अनुसार, एनडीए सरकार की ओर से सोमवार से शुरू होने वाले सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश करने की योजना है।
प्रस्तावित विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है।
इस पूरे राजनीतिक समीकरण में NCP-SP की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। पार्टी के पास लोकसभा में आठ और राज्यसभा में एक सीट होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सरकार के लिए पार्टी का समर्थन या कम से कम उसका तटस्थ रुख राजनीतिक रूप से अहम माना जा सकता है।
हालांकि, एनसीपी-SP की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने इस सप्ताह की शुरुआत में परिसीमन को लेकर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि अगर प्रस्तावित परिसीमन में सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है, तो इसका विरोध करने की कोई खास वजह नहीं होगी।
हालांकि, सुप्रिया सुले ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रस्ताव पर फैसला INDIA गठबंधन के भीतर चर्चा और बातचीत के बाद ही लिया जाएगा। उनकी ओर से NDA को समर्थन देने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
देवेंद्र फडणवीस के आवास पर बैठक के बाद बढ़ी अटकलें
महाराष्ट्र की राजनीति में इन चर्चाओं को तब और हवा मिली, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास पर एनसीपी के दोनों गुटों से जुड़े नेताओं के बीच मुलाकात हुई।
इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित पुनर्मिलन और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि यह बैठक किसी राजनीतिक पुनर्गठन या पार्टी विलय की रणनीति के तहत नहीं हुई थी, बल्कि इसमें कुछ विशेष स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों पर बातचीत हुई।
NCP-SP नेता जयंत पाटिल ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की पुष्टि की। उनके मुताबिक, उन्होंने सांगली जिले में अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े स्थानीय प्रशासनिक मुद्दे पर मुख्यमंत्री से चर्चा की थी।
जयंत पाटिल ने एकनाथ शिंदे से भी की मुलाकात
जयंत पाटिल ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात की।इन लगातार हो रही मुलाकातों को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, संबंधित नेताओं की ओर से इन बैठकों को स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों से जोड़कर ही बताया गया है।
शरद पवार की एकनाथ शिंदे से मुलाकात ने भी बढ़ाई चर्चा
इससे पहले खबर सामने आई थी कि शरद पवार ने पिछले सप्ताह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में अपने विधायकों के साथ बैठक की थी।
इस बैठक के लिए उपमुख्यमंत्री कार्यालय को चुने जाने पर भी सवाल उठे। हालांकि, सुप्रिया सुले ने इसे महज एक संयोग बताया और किसी बड़े राजनीतिक संकेत से जोड़ने से इनकार किया।
क्या महाराष्ट्र में फिर एक हो सकती है NCP?
महाराष्ट्र में एनसीपी के विभाजन के बाद से ही दोनों गुटों के बीच राजनीतिक दूरी बनी हुई है। लेकिन हाल के दिनों में दोनों पक्षों के नेताओं और सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख नेताओं के बीच हुई मुलाकातों ने NCP Unity, NCP Merger और संभावित राजनीतिक पुनर्गठन की चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर होने वाली सामान्य राजनीतिक मुलाकातें हैं या फिर पर्दे के पीछे महाराष्ट्र की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है?
फिलहाल NCP-SP के NDA में शामिल होने या दोनों एनसीपी गुटों के एक होने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन चर्चाओं को फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अब सवाल आपसे…
क्या आपको लगता है कि शरद पवार की NCP-SP और अजित पवार की NCP फिर से एक हो सकती हैं?
क्या NCP का NDA में शामिल होना महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित होगा, या ये सिर्फ राजनीतिक अटकलें हैं?
आपकी क्या राय है? महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में क्या बड़ा बदलाव हो सकता है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं और इस खबर को शेयर करें।



