कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा के सीएम सुभेंदु अधिकारी ने बकरीद की छुट्टी में कटौती करने का फैसला लिया है। ममता बनर्जी ने पहले दो दिन की छुट्टी के आदेश दिए थे, लेकिन अब इसे एक दिन कर दी गई है। सुभेंदु अधिकारी ने इसके पहले भी ममता सरकार के कई फैसले बदले हैं।
लेटर हेड से उर्दू हटाने का भी फैसला
सुभेंदु अधिकारी ने अपने आधिकारिक लेटरहेड से उर्दू और हिंदी को हटाकर उसे एक बार फिर ‘द्विभाषी’ (बांग्ला और अंग्रेजी) बना दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी सरकार के सबसे पसंदीदा प्रतीक ‘बिस्वा बांग्ला’ का ‘बी’ वाला लोगो को भी हटा दिया है।
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उर्दू को लेकर भाजपा साधती रही है निशाना
भाजपा लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस पर बंगाल में ‘अरबी संस्कृति’ को बढ़ावा देने और तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है। भाजपा का मानना है कि 10 प्रतिशत से अधिक उर्दू भाषी आबादी वाले क्षेत्रों में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देना इसी राजनीति का हिस्सा था। अब अधिकारी सरकार के इस कदम को भाजपा ‘बंगाली गौरव और पहचान’ की पुनर्स्थापना के रूप में देख रही है।
इमामों, मुअज्जिनों, पुजारियों का भत्ता बंद
सुभेंदु अधिकारी ने इमामों, मुअज्जिनों और पुजारियों को धर्म के आधार पर मिलने वाले सरकारी भत्ते को 1 जून से पूरी तरह बंद कर दिया। इसके साथ ही ममता सरकार द्वारा सालों से रोकी गई केंद्र की आयुष्मान भारत योजना को राज्य में लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही उपद्रवियों से सरकारी संपत्ति के नुकसान वसूली का भी फैसला लिया गया था। इतना ही नहीं ममता सरकार में वर्षों से अटकी बीएसएफ की जमीन की बाधा भी हटा दिया गया था। इसके साथ ही टीएमसी शासनकाल में हुए फंड डिस्ट्रीब्यूशन घोटाले और पुलिस ज्यादतियों की जांच के लिए जस्टिस बिस्वजीत दास आयोग का गठन किया गया है।



