नई दिल्ली। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा में आने के साथ ही एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ है। नीतीश की पार्टी के नेता हरिवंश उर्फ हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर से राज्यसभा भेज दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का नामित सदस्य के रूप में मनोनीत किया है।
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव में इस बार जदयू की ओर से हरिवंश नारायण सिंह को मौका नहीं दिया गया था। हरिवंश का उच्च सदन के सदस्य के रूप में कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो गया था। अब वे फिर से राज्यसभा सदस्य मनोनीत हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा की सीट रिक्त होने पर उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। वे राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। वे उच्च सदन के उपसभापति के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
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केंद्र सरकार की एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उसी अनुच्छेद के खंड (3) के साथ पढ़ा जाए, तो राष्ट्रपति मनोनीत सदस्यों में से एक की सेवानिवृत्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए हरिवंश नारायण सिंह को राज्य परिषद में मनोनीत करने की कृपा करती हैं।
पत्रकारिता से राजनीति में पहुंचे
हरिवंश वरिष्ठ पत्रकार हैं और कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उन्होंने काम किया है। उनका जन्म 30 जून 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था। वे पूर्व प्रदानमंत्री चंद्रशेखर के काफी करीब रहे हैं। बाद में वे जदयू से जुडे और 2014 में पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने गए थे। इसके बाद वे लगातार इस पद पर रहे। वे 9 अगस्त 2018 को राज्यसभा के उपसभापति बनाए गए। इसके बाद फिर 14 सितंबर 2020 को राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित हुए थे।



