तमिलनाडु की सत्ता संभालते ही नए मुख्यमंत्री विजय ने बड़ा और चर्चित फैसला लेकर राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री विजय ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और बस अड्डों के 500 मीटर के दायरे में मौजूद सरकार संचालित सात सौ से ज्यादा शराब दुकानों को बंद किया जाएगा। सरकारी आदेश में साफ कहा गया है कि इस फैसले को अगले दो हफ्तों के भीतर लागू करना होगा।
तमिलनाडु में शराब की दुकानों को लेकर लंबे समय से विवाद और विरोध होता रहा है। जनता लगातार मांग कर रही थी कि स्कूलों, कॉलेजों और मंदिरों के आसपास चल रही शराब दुकानों को हटाया जाए, लेकिन इन दुकानों से होने वाली भारी कमाई के कारण पिछली सरकारें इस दिशा में ठोस कदम उठाने से बचती रही थीं।
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राज्य में चाहे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम हो या अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, लगभग हर दल ने अपने चुनावी घोषणापत्र में शराबबंदी का वादा किया था। हालांकि पूर्ण शराबबंदी लागू करने की दिशा में कोई सरकार निर्णायक कदम नहीं उठा सकी।
साल 2023 में एमके स्टालिन की सरकार ने जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद करीब 500 सरकारी शराब दुकानों को बंद करने का फैसला लिया था। इनमें स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों के पास स्थित दुकानें शामिल थीं। इसके अलावा जिन इलाकों में स्थानीय लोगों ने शराब दुकानों का विरोध किया था, वहां से भी दुकानों को हटाया गया था।
तमिलनाडु में इस समय 5000 से ज्यादा सरकारी शराब दुकानें संचालित हैं, जिनसे राज्य सरकार को करीब 40 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। यही वजह रही कि पूर्ण शराबबंदी हमेशा राजनीतिक बहस का विषय बनी रही।
मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद विजय लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। उन्होंने राज्य में 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी कई लोकलुभावन घोषणाएं की हैं। इसके अलावा उन्होंने पिछली स्टालिन सरकार के वित्तीय मामलों की जांच के लिए श्वेत पत्र जारी करने का भी ऐलान किया है। विजय के लगातार बड़े फैसलों ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह नई दिशा दे दी है।



