ट्रंप की चेतावनी के बाद ओपेक देशों का बड़ा फैसला, तेल उत्पादन बढ़ाने पर बनी सहमति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ओपेक+ गठबंधन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। तेल निर्यातक देशों के इस समूह ने तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है, जिससे पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद की जा रही है।
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प्रतिदिन 5.47 लाख बैरल बढ़ेगा उत्पादन
ओपेक+ के आठ सदस्य देशों ने घोषणा की है कि वे सितंबर से प्रतिदिन 547,000 बैरल अतिरिक्त तेल का उत्पादन करेंगे। इन देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। यह निर्णय रविवार को हुई वर्चुअल बैठक के दौरान लिया गया।
स्वैच्छिक कटौती खत्म करने का फैसला
अब तक ये देश नवंबर 2023 से स्वेच्छा से तेल उत्पादन में कटौती कर रहे थे, जिसे पहले सितंबर 2026 तक जारी रखने की योजना थी। लेकिन अब उन्होंने इस कटौती को समय से पहले समाप्त करने का निर्णय लिया है। जुलाई में भी ओपेक+ ने अगस्त में उत्पादन बढ़ाकर 548,000 बैरल प्रतिदिन करने का ऐलान किया था।
कीमतों में गिरावट की उम्मीद लेकिन अनिश्चितता बरकरार
तेल उत्पादन बढ़ाने से आमतौर पर बाजार में आपूर्ति बढ़ती है और कीमतों में गिरावट आती है। हालांकि, क्लियरव्यू एनर्जी पार्टनर्स के अनुसार, मौजूदा समय में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल बनी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण रूस से संभावित कम आपूर्ति और चीन में तेल का अधिक भंडारण बताया जा रहा है।
ट्रंप की चेतावनी का प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि रूस 7 अगस्त तक यूक्रेन के साथ शांति समझौता नहीं करता, तो अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर द्वितीयक शुल्क लगाएगा। यह स्थिति भी वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
अगली बैठक 7 सितंबर को
ओपेक ने बताया कि इन आठ देशों के प्रतिनिधि 7 सितंबर को फिर से बैठक करेंगे, जिसमें बाज़ार की स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
निष्कर्ष
ओपेक+ देशों द्वारा तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला वैश्विक तेल बाज़ार और आम उपभोक्ताओं के लिए राहतभरा कदम हो सकता है। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और बाज़ार की अस्थिरता के चलते कीमतों में कितनी गिरावट आएगी, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी।



