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नई दिल्ली। जेल से बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने एक चौंकाने वाला दांव खेला है, लेकिन वे ऐसा पहले भी कर चुके हैं। इस बार खुद पर लगे दाग और 10 साल से आप की सरकार के दौरान लोगों की नाराजगी से आप की नैया पार लगाने के लिए उन्होंने यह दांव खेला है। केजरीवाल यह जानते हैं कि मुफ्त के कई वादों के बाद भी दिल्ली के लोग आप से खुश नहीं हैं। एमसीडी पर भी आप का कब्जा है, लेकिन लोग गंदगी, पानी, डेंगू आदि की समस्या से जूझते रहते हैं।
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप को कांग्रेस से भी डर है। इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह वापसी की है, निश्चित तौर पर वह आप के वोटों पर असर डालेगी। भाजपा भी अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही है। इन सबके बीच जनता की नाराजगी से पार पाना आप के लिए मुश्किल होगा। इसीलिए केजरीवाल ने यह दांव खेला है। केजरीवाल इस्तीफा देकर यह जताना चाह रहे हैं कि वे कितने सिद्धांतवादी और ईमानदार हैं।
अन्ना हजारे ने कहा-पहले ही मना किया था
जिस अन्ना हजारे के आंदोलन से अरविंद केजरीवाल की किस्मत चमकी अब उसी अन्ना साहब का एक बयान भी आया है। अन्ना हजारे का कहना है कि उन्होंने केजरीवाल से कहा था कि राजनीति में नहीं जाना। समाज सेवा आनंद देती है, इसका आनंद लो, लेकिन वे नहीं माने।



