नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) दिल्ली के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने 3,000 से ज्यादा छात्रों को डिग्रियां दी। इस दौरान पीएम मोदी ने छात्रों को जिंदगी के गुर बताए।
पीएम ने कहा कि कैंपस का जीवन और उसके बाहर का जीवन अलग होता है। आईआईटी की परीक्षा में सिलेबस होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस होता है। कैंपस लाइफ में सारे फंडे क्लियर होते थे। क्या पढ़ना है और कौन सा असाइनमेंट पूरा करना है। सब कुछ पहले से तय होता है, लेकिन जिंदगी अलग तरीके से चलती है. वहां न कोई तय कोर्स होता है और न असाइनमेंट होता है।
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कैंपस का माहौल हमेशा याद आएगा
पीएम ने कहा कि जब-जब जीवन आपको पीछे मुड़कर देखने का अवसर देगा, तो यह कैंपस लाइफ आपको याद आएगी। आप अपनी हर सफलता में यहां के प्रोफेसर्स, माहौल आदि को याद करेंगे। इसलिए यहां से हर चीज को एसेट के तौर पर साथ लेकर निकलना और भूल मत जाना। मेरा आग्रह होगा कि जाते-जाते यहां के हर सदस्य से मिलकर जाएं और कोशिश करिएगा कि यह रिश्ता हमेशा ताजा बना रहे। आज आप ऐसे समय में इस संस्थान से निकल रहे हैं, जब दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है।
बदवाल के साथ चुनौतियां भी आती हैं
पीएम मोदी ने कहा कि सबसे बड़ी चीज तकनीक की स्पीड है. आज कोई भी निश्चित तौर पर यह नहीं कह सकता कि अगले 20 से 30 साल बाद दुनिया कैसी होगी। जब-जब बदलाव आता, तो चुनौतियां भी आती हैं। हर कुछ बदल रहा है और प्रोफेशन बदल रहे हैं, अवसर बदल रहे हैं। पर मेरी यह बात ध्यान रखिए कि जो सीखेगा, वह जीतेगा।
चुनौतियों को छोटे-छोटे हिस्से में बांट दीजिए
पीएम मोदी ने कहा कि निश्चित रूप से अकादमिक डिग्री और स्कोर का अपना महत्व है, लेकिन मुझे लगता है कि आपकी डिग्री दुनिया को यह बताती है कि आप कठिन समस्याओं का समाधान करना जानते हैं। आप आईआईटी दिल्ली के अपने सफर को याद कीजिए। यहां तक पहुंचना आसान नहीं था और यहां की पढ़ाई भी आसान नहीं थी, लेकिन आपने हार नहीं मानी। यह डिग्री आपको एक दिन में नहीं मिली। एक-एक विषय और एक-एक प्रोजेक्ट, मिड सेमेस्टर और एंड सेमेस्टर जैसे छोटे-छोटे कदमों ने आपको यहां तक पहुंचाया है। जीवन भी इसी सिद्धांत से चलता है। जब कोई चुनौती बहुत बड़ी लगे तो उससे घबराइए मत। उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दीजिए।
पीएम ने कहा-मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं
पीएम मोदी ने ल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन कुछ तो चलता होगा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के मन में अपने आने वाले कल की तस्वीर होती है। कोई पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा, कोई स्टार्टअप का सपना देख रहा होगा और किसी ने अगली प्रतियोगी परीक्षा को अपना लक्ष्य बनाया होगा।



