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जलवायु संकट की नई चेतावनी: ग्रहीय तरंगें तीन गुना बढ़ीं, हीटवेव और बाढ़ की बड़ी वजह
जलवायु परिवर्तन को लेकर हुए एक हालिया अध्ययन में बड़ा खुलासा हुआ है। अध्ययन के अनुसार, पिछले 75 वर्षों में पृथ्वी पर ग्रहीय तरंगों (Planetary Waves) की संख्या तीन गुना तक बढ़ गई है। ये तरंगें अत्यधिक गर्मी, हीटवेव, सूखा और बाढ़ जैसी चरम मौसमी घटनाओं से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 1950 में गर्मियों के दौरान पृथ्वी पर औसतन एक बार ग्रहीय तरंगें सक्रिय होती थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर तीन हो गई है। यह निष्कर्ष अमेरिका की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस द्वारा प्रकाशित अध्ययन में सामने आया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन ग्रहीय तरंगों की बढ़ती सक्रियता के कारण मौसम विशेषज्ञों के अनुमान लगातार असफल हो रहे हैं। इसके चलते न केवल हीटवेव और बाढ़ की घटनाएं बढ़ी हैं, बल्कि उनका पूर्वानुमान भी मुश्किल होता जा रहा है।
उदाहरण के तौर पर:
- 2021 में उत्तर पश्चिम प्रशांत महासागर क्षेत्र में आई हीटवेव,
- 2010 में रूस में पड़ी भयंकर गर्मी,
- 2003 में यूरोप की घातक हीटवेव,
- और पाकिस्तान में आई बाढ़,
इन सभी घटनाओं के पीछे ग्रहीय तरंगों की अहम भूमिका रही है।
विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में मौसम और भी अनिश्चित और खतरनाक हो सकता है।



