संसद में महाकुंभ पर बोले पीएम मोदी- सवाल उठाने वालों को सफल आयोजन से मिला जवाब

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नई दिल्ली। लोकसभा में आज पीएम मोदी ने महाकुंभ पर चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि महाकुंभ पर सवाल उठाने वालों को सफल महाकुंभ एक जवाब है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में छोटे–बड़े का कोई भेद नहीं था। बिखराव के दौर में हमारी एकता अहम बिंदु है। इसमें एकता का अमृत निकाला है।

पीएम ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ से अनेक अमृत निकले हैं। इसमें एकता का अमृत निकाला है। इस आयोजन में देश के हर क्षेत्र और हर कोने से आकर एक हो गए। लोग अहम् से वयम् के भाव में एक हुए। पीएम मोदी ने लोकसभा में आज अपने भाषण मं कहा कि महाकुंभ विरासत से जुड़ने की पूंजी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महाकुंभ में हमने राष्ट्रीय चेतना के विराट रूप के दर्शन किए।

पीएम महाकुंभ की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए उन तत्वों पर भी कड़ा प्रहार किया जिन्होंने महाकुंभ को लेकर नकारात्मक बातें कीं। मोदी ने कहा कि महाकुंभ के सफल आयोजन ने उन शंकाओं को भी उचित जवाब दिया है जो हमारे सामर्थ्य को लेकर कुछ लोगों के मन में रहती है। उन्होंने कहा कि हर राष्ट्र के जीवन में ऐसे पल आते हैं जब सदियों के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बन जाते हैं। प्रयागराज महाकुंभ को ही ऐसे ही पड़ाव के रूप में देखता हूं जिसमें जागरूक होते हुए देश का प्रतिबिंब नजर आता है।

देश का सामर्थ्य बताती है सामूहिक चेतना,

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हम सभी ने ये महसूस किया था कि कैसे देश अगले 1000 वर्षों के लिए तैयार हो रहा है। इसके ठीक एक साल बाद महाकुंभ के इस आयोजन ने हम सभी के इस विचार को और दृढ़ किया है। देश की यह सामूहिक चेतना, देश का सामर्थ्य बताती है।

जागृत होते हुए देश का प्रतिबिंब

पीएम ने कहा कि जैसे भक्ति आंदोलन के कालखंड में हमने देखा कि कैसे देश के कोने–कोने में आध्यात्मिक चेतना उभरी। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में एक सदी पहले जो भाषण दिया, वो भारत की आध्यात्मिक चेतना का जयघोष था, उसने भारतीयों के आत्मसम्मान को जगा दिया था। हमारी आजादी के आंदोलन में भी अनेक ऐसे पड़ाव आए। 1857 का स्वातंत्र्य संग्राम हो, वीर भगत सिंह की शहादत का समय हो, नेताजी सुभाष बाबू का दिल्ली चलो का जयघोष हो, गांधीजी का दांडी मार्च

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