राहुल गांधी की विदेश नीति पर टिप्पणी के बाद BJP और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के बयान को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसी भाषा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी से प्रधानमंत्री के साथ-साथ भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचता है।
मामला उस समय गरमा गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं और विदेश नीति पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि भारत का प्रधानमंत्री विदेशों में दोस्ती करने नहीं, बल्कि देश के हितों और सुरक्षा की बात करने जाता है।
👉 यह भी पढ़ें:
- BRICS शिखर सम्मेलन 2026: PM मोदी की 15 द्विपक्षीय बैठकें और 10 बड़े फैसले
- BRICS के 20 साल: पीएम मोदी ने बताया कैसे 4 देशों से बढ़ा 21 देशों का परिवार
- राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले ‘लेटर वॉर’
- राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए भाजपा नगर अध्यक्ष ने पटवारी को लिखा पत्र, सुझाए कई स्थान
- राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए कांग्रेस ने खेला दांव, डेली कॉलेज से मांगी जगह
- राहुल गांधी पर FIR से भड़की MP कांग्रेस, जीतू पटवारी और कमलनाथ ने BJP पर साधा निशाना

इसी दौरान राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाया और प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी नेताओं से गले मिलने के अंदाज पर टिप्पणी की। इसके बाद संदीप दीक्षित ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र किया, जिससे मंच पर हुई इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई।
राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है।
यह विवाद केवल राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में बड़ा सवाल यह भी है कि भारत की विदेश नीति, प्रधानमंत्री की विदेशी यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर विपक्ष को किस तरह सवाल उठाने चाहिए और क्या राजनीतिक बहस में व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए।
दिलचस्प बात यह है कि संदीप दीक्षित पहले भी विवादित राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। 2017 में सेना प्रमुख पर उनकी टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से उसे गलत बताया था।
अब सवाल जनता से
क्या राहुल गांधी की टिप्पणी राजनीतिक आलोचना की सीमा में थी या भाषा की मर्यादा पार हुई?
क्या नेताओं को राजनीतिक असहमति के बावजूद व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए?
आप राहुल गांधी और राजनाथ सिंह के बयान को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



