बीएसई-सेंसेक्स और एनएसई-निफ्टी में गिरावट का दौर सोमवार से शुरू होकर मंगलवार को भी जारी रहा। इस गिरावट ने निवेशकों के लिए चिंता बढ़ा दी है। बाजार के इस दबाव में कुछ चुनिंदा शेयरों में ही तेजी देखने को मिली।
सोमवार को बीएसई-सेंसेक्स और एनएसई-निफ्टी में भारी गिरावट
28 सितंबर 2026 को बीएसई-सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52% टूटकर 72,771.72 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई-निफ्टी 360.25 अंक यानी 1.56% गिरकर 22,780.25 के स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट पिछले छह महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का संकेत है।
👉 यह भी पढ़ें:
- सेंसेक्स 1124 अंकों की गिरावट के साथ बंद, निवेशकों को 8 लाख करोड़ का नुकसान
- 24 सितंबर की गिरावट के बाद आज शेयर बाजार में मामूली सुधार
- शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 1247 अंक टूटा, निफ्टी 23100 के नीचे बंद
- बजार में वापसी: निफ्टी 117 अंक ऊपर, सेंसेक्स 299 अंक बढ़ा, जानें 3 बड़ी वजहें
- 22 सितंबर 2026: IT, फार्मा और सीमेंट शेयरों में गिरावट से सेंसेक्स टूटा
- बाजार में हरियाली का माहौल, सेंसेक्स 560 अंक बढ़त के साथ बंद
सोमवार को हुई इस गिरावट ने निवेशकों के ₹7.4 लाख करोड़ मूल्य के नुकसान का कारण बनी। इस दबाव में बाजार में हड़कंप मचा रहा।

मंगलवार को भी गिरावट का दबाव बना रहा
29 सितंबर की सुबह बाजार फिर गिरावट के साथ खुला। दोपहर करीब 1:33 बजे तक सेंसेक्स 426.83 अंक यानी 0.59% गिरकर 72,344.89 पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान एनएसई-निफ्टी भी नीचे की ओर रहा।
मंगलवार को बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के मार्केट कैप से ₹4 लाख करोड़ से अधिक की रकम साफ हो गई। यह लगातार बिकवाली का परिणाम था।
कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बाजार पर दबाव
इस गिरावट के प्रमुख कारणों में ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत $106 प्रति बैरल से ऊपर जाना शामिल है। इसके अलावा, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली भी बाजार को कमजोर कर रही है।
यह कारण बाजार की नकारात्मकता को बढ़ा रहे हैं और निवेशकों की बेचैनी को बढ़ावा दे रहे हैं।

कुछ चुनिंदा स्टॉक्स में तेजी देखी गई
गिरावट के इस माहौल में भी कुछ शेयर हरे निशान पर रहे। इनमें सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन (इंडीगो), अडानी पोर्ट्स और डॉ. रेड्डीज लैब्स प्रमुख हैं। इन कंपनियों ने निवेशकों को उम्मीद दी है।
यह तेजी संकेत देती है कि पूरे बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ सेक्टर और कंपनियां स्थिर बनी हुई हैं।
बाजार को नीचे गिराने वाले प्रमुख शेयर्स
बाजार की गिरावट में बजाज फाइनेंस, जो करीब 2% से अधिक टूट गया, मुख्य भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स और इंफोसिस जैसे बड़े शेयर भी कमजोरी दिखा रहे हैं।
इन कंपनियों की गिरावट ने कुल मिलाकर बाजार में दबाव बढ़ाया है।
निवेशकों के लिए इस गिरावट का अर्थ और आगे की संभावनाएं
इस लगातार गिरावट का असर आम निवेशकों की जेब पर पड़ता है। निवेशकों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, जिससे उनकी आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है और विदेशी निवेशक बाजार में लौटते हैं, तो बाजार में सुधार की संभावनाएं बन सकती हैं। फिलहाल, बाजार में सावधानी बरतना जरूरी है।



