इंदौर/नागपुर। महाराष्ट्र के अल्लापल्ली वन क्षेत्र में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने वन विभाग, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB), मुंबई और USTR एंटी-पोचिंग यूनिट के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए छह लोगों को पकड़ा है। आरोपियों के कब्जे से एक वयस्क और एक बच्चे समेत दो जिंदा पैंगोलिन, करीब 3 किलो बाघ की हड्डियां और बाघ के दो कैनाइन (दांत) बरामद किए गए हैं।
सूचना के आधार पर कार्रवाई
DRI के अनुसार, एजेंसियों को सूचना मिली थी कि कुछ लोग विलुप्तप्राय और संरक्षित वन्यजीवों के अवैध कारोबार में शामिल हैं और उनकी मुलाकात सिरोंचा रोड स्थित अल्लापल्ली वन क्षेत्र में होने वाली है। सूचना के आधार पर 26 सितंबर को DRI और सहयोगी एजेंसियों की टीम ने अल्लापल्ली वन क्षेत्र के आसपास निगरानी शुरू की। निगरानी के दौरान छह संदिग्धों को रोका गया। तलाशी में उनके पास से एक जिंदा वयस्क पैंगोलिन, एक जिंदा बच्चा पैंगोलिन, तीन किलो बाघ की हड्डियां और बाघ के दो दांत मिले। इनके अलावा तस्करी में इस्तेमाल की जा रही दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की गईं।
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पूछताछ में सामने आए तस्करी नेटवर्क के सुराग
DRI के मुताबिक, पकड़े गए लोगों से लगातार पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और सुरागों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की गई। DRI, वन विभाग अल्लापल्ली और WCCB की संयुक्त टीमों ने इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली। इन कार्रवाइयों में बाघों के अवैध शिकार, उनके अंगों को रखने, परिवहन करने और बिक्री की तैयारी से जुड़े आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, मामले में वन्यजीव तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पैंगोलिन और बाघ के अंगों का कारोबार प्रतिबंधित
DRI ने बताया कि पैंगोलिन को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में संरक्षित प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। यह CITES के Appendix-I में भी शामिल है और इसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधित है। इसी तरह बाघ भी वन्यजीव संरक्षण कानून की अनुसूची-1 में शामिल है। बाघ की खाल अथवा उसके किसी भी अंग की खरीद-बिक्री, व्यापार या अवैध रूप से रखना कानूनन प्रतिबंधित है। बरामद दोनों पैंगोलिन, तीन किलो बाघ की हड्डियां, दो बाघ के कैनाइन और दो मोटरसाइकिलों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत जब्त कर लिया गया है। आगे की कानूनी कार्रवाई वन विभाग द्वारा की जा रही है।



