दिहाड़ी मजदूर की बेटी पूजा सिंह ने एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर महिलाओं की ऊंची कूद में भारत के लिए एक नई मिसाल कायम की है। यह उपलब्धि 29 सितंबर 2026 को आइची-नागोया एशियन गेम्स में महिलाओं की हाई जंप फाइनल में 1.84 मीटर की छलांग लगाकर हासिल की गई।
पूजा सिंह ने 24 साल बाद भारत को एशियन गेम्स में पदक दिलाया
महिलाओं की ऊंची कूद स्पर्धा में भारत को 24 साल बाद एशियन गेम्स में पदक मिला है। इससे पहले यह उपलब्धि 2002 में बॉबी एलॉयसियस ने रजत पदक जीतकर हासिल की थी। पूजा सिंह के कांस्य पदक ने इस लंबे अंतराल को खत्म किया है।
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यह पदक न केवल खेल जगत में बल्कि आम जनता के लिए भी प्रेरणादायक है। इससे युवा खिलाड़ियों को अपनी मेहनत जारी रखने की सीख मिलेगी।

फतेहाबाद की दिहाड़ी मजदूर की बेटी ने कठिनाईयों को हराया
पूजा सिंह हरियाणा के फतेहाबाद जिले के बोस्ती गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता हंसराज एक कंस्ट्रक्शन वर्कर हैं जो दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं। आर्थिक तंगहाली के बावजूद उन्होंने कर्ज लेकर अपनी बेटी को खेल के लिए प्रोत्साहित किया।
पूजा के शुरुआती दिनों में प्रशिक्षण के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने बांस के डंडों और भूसे की बोरियों का सहारा लेकर अभ्यास शुरू किया। यह संघर्ष उनकी सफलता की कहानी का अहम हिस्सा है।
पूर्व एथलीट सहारा कुमारी के मार्गदर्शन में पूजा सिंह का प्रशिक्षण
पूजा सिंह वर्तमान में पूर्व एथलीट सहारा कुमारी की देखरेख में प्रशिक्षण ले रही हैं। कोचिंग और मार्गदर्शन ने उनकी तकनीक और प्रदर्शन में सुधार किया है।
उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1.93 मीटर है, जो उन्होंने मई 2026 में हांगकांग में आयोजित एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में हासिल किया था। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय रिकॉर्ड के रूप में दर्ज है।

19 वर्ष की उम्र में ऐतिहासिक उपलब्धि
पूजा सिंह का जन्म 21 फरवरी 2007 को हुआ था। 19 वर्ष की उम्र में एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतना उनकी प्रतिभा और मेहनत का प्रमाण है।
यह उपलब्धि भारतीय खेलों में युवाओं के लिए नई उम्मीद जगाती है। उनके भविष्य के लिए यह एक मजबूत आधार भी है।
महिलाओं की ऊंची कूद में भारत की स्थिति और आगे की संभावनाएं
महिलाओं की ऊंची कूद में भारत की यह सफलता खेल क्षेत्र में उत्साह बढ़ाने वाली है। इससे अन्य खिलाड़ियों और खेल संगठनों को भी लाभ होगा।
आगे पूजा सिंह के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन की संभावनाएं हैं। इसके साथ ही देश में खेल के लिए बुनियादी सुविधाओं और समर्थन में वृद्धि की उम्मीद भी जागेगी।
पूजा सिंह की सफलता का आम लोगों पर प्रभाव
पूजा सिंह की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद मेहनत और समर्पण से सफलता हासिल की जा सकती है।
यह कहानी खासकर उन परिवारों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे समाज में खेल के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ेगी।



