ब्रिक्स के 20 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में शुरू हुए 18वें BRICS समिट के दौरान ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए बताया कि कैसे इस समूह ने चार देशों से बढ़कर 21 देशों का परिवार बन गया है। ब्रिक्स समूह की ताकत और विस्तार के बाद वैश्विक स्तर पर इसके प्रभाव में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है।
BRICS के विस्तार का सफर: चार से इक्कीस देशों तक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि 2006 में जब ब्रिक्स की शुरुआत हुई थी, तब केवल चार देश—ब्राजील, रूस, भारत और चीन—इस समूह का हिस्सा थे। हालांकि, आज ब्रिक्स के सदस्य देशों और पार्टनर देशों को मिलाकर कुल 21 देशों का बड़ा परिवार बन चुका है। इस विस्तार ने समूह की वैश्विक मौजूदगी और सामूहिक ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है।
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इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब ब्रिक्स केवल एक आर्थिक समूह नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और व्यापार में एक महत्वपूर्ण शक्ति बन गया है। नई सदस्यता से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर पैदा हुए हैं।
BRICS के आर्थिक योगदान में अभूतपूर्व वृद्धि
पीएम मोदी ने बताया कि वर्तमान में ब्रिक्स देश दुनिया की 50 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा, ये देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालते हैं। यह आंकड़े समूह की बढ़ती आर्थिक ताकत को दर्शाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो दशकों में जहां वैश्विक GDP करीब 1.5 गुना बढ़ी है, वहीं ब्रिक्स देशों की संयुक्त GDP लगभग साढ़े चार गुना बढ़ी है। इसका मतलब है कि ब्रिक्स की आर्थिक वृद्धि दुनिया की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से हुई है।
वैश्विक नवाचार और समाधान के केंद्र के रूप में ब्रिक्स
प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स देश अब वैश्विक नवाचार और समाधानों के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं। ये देश तकनीक, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ग्रासरूट स्तर की पहलों से लेकर अत्याधुनिक तकनीकों तक, BRICS देशों में नवाचार की संभावनाएं तेजी से आकार ले रही हैं। इस वजह से समूह का वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान भी विश्व स्तर पर बढ़ रहा है।
भारत की BRICS अध्यक्षता: मजबूती, नवाचार और सहयोग
इस साल भारत की BRICS अध्यक्षता का विषय “मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखा गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने इस मंत्र को अपनी आर्थिक और व्यापार नीतियों का आधार बनाया है।
भारत ने ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सप्लाई चेन को अधिक विविध और भरोसेमंद बनाया है। इस लचीलापन के कारण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत विकास और स्थिरता का भरोसा देता है।
BRICS में महिलाओं की भागीदारी और समुद्री सुरक्षा पर जोर
पीएम मोदी ने BRICS विमेंस विंग्स बिजनेस अलायंस की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमियों को विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। यह समूह आर्थिक विकास में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता पर बल दिया। भारत इस दिशा में एक मजबूत समर्थक रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधारहित और सुरक्षित हो सके।
BRICS का भविष्य: बढ़ती उम्मीदें और वैश्विक प्रभाव
BRICS के विस्तार और आर्थिक ताकत में वृद्धि से यह स्पष्ट होता है कि समूह का वैश्विक प्रभाव और भी मजबूत होगा। बढ़ते सहयोग, नवाचार और स्थिरता के प्रयासों के चलते BRICS देशों का संयुक्त वजन भविष्य में विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था में और बढ़ेगा।
इससे आम आदमी पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा क्योंकि अधिक व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विकास दर में सुधार होगा। BRICS की यह यात्रा वैश्विक सहयोग का एक नया उदाहरण प्रस्तुत करती है।



