इंदौर। कुछ समय पहले पार्षद जीतू यादव की भाजपा में वापसी हुई थी, लेकिन एमआईसी का पद नहीं मिला था। शुक्रवार को उनकी एमआईसी में भी वापसी हो गई है। जीतू यादव का कई भाजपा नेताओं ने विरोध किया था, लेकिन विधायक रमेश मेंदोला के आगे किसी की नहीं चली।
सूत्र बताते हैं कि भोपाल में इंदौर के कुछ नेता और विधायक इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मिले। इन नेताओं ने जीतू के खिलाफ हुई शिकायतों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष को अपने तर्क दिए। सच्चाई भी बताई गई। इसके बाद वापसी का फैसला लिया गया।
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मेंदोला ने संभाल रखा था मैदान
पार्षद जीतू यादव, विधायक रमेश मेंदोला के खास हैं। उनके प्रयासों से ही जीतू की भाजपा में वापसी हुई थी। इसके बाद मेंदोला लगातार एमआईसी में वापसी के प्रयास कर रहे थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची शिकायतों के कारण मामला अटका हुआ था। इस मामले में जीतू यादव का साथ विधायक गोलू शुक्ला ने भी दिया।
चार नंबर खेमा कर रहा था विरोध
जीतू यादव की वापसी का सबसे ज्यादा विरोध चार नंबर खेमा कर रहा था, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। इसका कारण पिछले दिनों विधानसभा चार के प्रभारी तथा विधायक मालिनी गौड़ के खास वीरेंद्र शेडगे द्वारा संघ कार्यकर्ताओं से मारपीट से उपजा विवाद रहा। इस प्रकरण में शेडगे को पद से हटा दिया गया था, लेकिन पार्टी से निलंबित नहीं किया गया था। संघ कार्यकर्ता की शिकायत पर शेडगे सहित मालिनी गौड़ के कई समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था।
पिछले कुछ समय से चल रहा था खेला
करीब 18 महीने बाद जीतू यादव का निष्कासन समाप्त हुआ था। जिस दिन यह आदेश आया उसके कुछ ही घंटों पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बड़ा खेला कर दिया। उन्होंने करीब 18 महीने से खाली जीतू यादव के विभाग की जिम्मेदारी निरंजन सिंह गुड्डू को सौंप दी। इसके पीछे महापौर का तर्क था कि काम का नुकसान हो रहा था। यहां बड़ा सवाल यह है कि जब काम का नुकसान हो रहा था, तो यह फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया?
कालरा से विवाद के बाद हुआ था निष्कासन
उल्लेखनीय है कि जनवरी 2025 में भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हंगामा किया था। इस दौरान मारपीट भी हुई थी। इस मामले ने भाजपा की राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। घटना के बाद जीतू यादव को संदेही मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी। भाजपा संगठन ने तुरंत जीतू यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था।
पुलिस की क्लिन चिट के बाद हुई वापसी
भाजपा संगठन ने तो जीतू यादव को बिना घटनाक्रम की ठीक से जांच-पड़ताल किए ही सिर्फ आरोपों पर पार्टी से बाहर कर दिया था। लेकिन, इस विवाद की जांच में पुलिल के हाथ कुछ नहीं लगा। पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद जीतू यादव का नाम पूरक चालान से हटा दिया था। पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस की क्लिन चिट के बाद जीतू यादव की पार्टी में वापसी हुई है।



