इंदौर। भाजपा संगठन का रवैया इन दिनों समझ नहीं आ रहा। पार्षद कमलेश कालरा के विवाद में जीतू यादव पर तुरंत एक्शन लेते हुए पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। दूसरी तरफ कुत्ता विवाद में संघ कार्यकर्ताओं से मारपीट करने वाले विधानसभा 4 के पूर्व प्रभारी वीरेंद्र शेड़गे पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
जीतू यादव को पुलिस ने दी क्लीन चिट
भाजपा नेता और एमआईसी सदस्य रहे जीतू यादव को पार्टी ने जिस विवाद में बाहर का रास्ता दिखाया था, उसमें पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद जीतू यादव का नाम पूरक चालान से हटा दिया गया है। पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं।
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जनवरी 2025 का है मामला
उल्लेखनीय है किजनवरी 2025 में भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हंगामा किया था। इस दौरान मारपीट भी हुई थी। इस मामले ने भाजपा की राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। घटना के बाद जीतू यादव को संदेही मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी। भाजपा संगठन ने तुरंत जीतू यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था।
घटनास्थल पर मौजूद होने के सबूत नहीं
पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान के अनुसार जांच के दौरान ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, जिनसे यह साबित हो सके कि जीतू यादव घटनास्थल पर मौजूद थे या उन्होंने सीधे तौर पर किसी प्रकार की धमकी या अभद्रता की थी। जांच में पार्षद कमलेश कालरा की पत्नी अर्चना कालरा, बेटे दीपेश और अन्य परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार इन बयानों में भी जीतू यादव की घटनास्थल पर मौजूदगी का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सीडीआर और मोबाइल लोकेशन निकाली जिसमें यह साबित हुआ कि जीतू यादव मौके पर मौजूद नहीं थे।
अब संगठन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
जीतू यादव को क्लीन चिट मिलने के बाद अब भाजपा संगठन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। उन्हें न केवल महापौर परिषद के सदस्य का पद गंवाना पड़ा था, बल्कि पार्टी से भी निष्कासित किया गया था। ऐसे में भाजपा नेता ही सवाल उठा रहे हैं कि बिना गलती आखिर संगठन ने उन पर ऐसी कार्रवाई क्यों की?
शेड़गे को नोटिस देकर चुप हो गया संगठन
दूसरी तरफ विधानसभा चार में एक कुत्ते द्वारा गंदगी किए जाने के मामले ने इतना तूल पकड़ा कि थाने में एफआईआर तक हो गई। दरअसल विधानसभा चार के प्रभारी वीरेंद्र शेड़गे ने इस विवाद में संघ के कार्यकर्ता को पीट दिया था। इसके बाद संघ के दबाव में न केवल थाने में केस दर्ज हुआ, बल्कि नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को शेड़गे को विधानसभा 4 के प्नभारी पद से हटाने का नोटिस जारी करना पड़ा।
प्रदेश अध्यक्ष का नाम लेकर दिया था नोटिस
नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने 7 जून को एक नोटिस जारी किया। इसकी पहली लाइन में ही बोल्ड अक्षरों में लिखा था कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देशानुसार आपको नोटिस दिया जा रहा है। विगत दिनों से आपका आचरण पार्टी की विचारधारा व पक्ष के अनुरूप नहीं आ रहा है। लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसलिए आपको तत्काल भाजपा विधानसभा 4 के पदाधिकारी पद से हटाया जा रहा है। आप तीन दिन में अपनी स्थिति स्पष्ट करें अन्यथा आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया जाएगा।
अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई
सूत्र बताते हैं कि शेड़गे ने नगर अध्यक्ष के नोटिस का जवाब देना तक उचित नहीं समझा। इसके बाद भी शेड़गे पर कोई कार्रवाई न होने कई सवाल खड़े करता है। एक तरफ तो संघ के दबाव में आप नोटिस देते हो, पुलिस केस दर्ज करती है, दूसरी तरफ उसी कार्यकर्ता पर एक्शन भी नहीं लेते। क्या अब संघ खामोश हो गया है या फिर विधानसभा 4 संघ पर भारी होता दिखाई दे रहा है।



