जीतू यादव की एमआईसी की राह में रोड़ा, महापौर और नगर अध्यक्ष कर रहे रमेश मेंदोला के साथ खेला!

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इंदौर। विधानसभा दो के विधायक रमेश मेंदोला के खास समर्थक जीतू यादव की तो भाजपा में वापसी हो गई है, लेकिन एमआईसी की राह में कई रोड़े हैं। जीतू यादव के नाम पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक रमेश मेंदोला के साथ खेला कर रहे हैं। ये चाहते हैं कि किसी भी हाल में जीतू यादव की एमआईसी में वापसी नहीं होनी चाहिए।

संगठन प्रभारी ने होल्ड पर रखा मामला

सूत्र बताते हैं कि नगर अध्यक्ष और महापौर के फीड बैक और सिफारिशों के कारण ही जीतू यादव की एमआईसी में वापसी फिलहाल टल गई है। बताया जाता है कि इंदौर संभाग के प्रभारी रणवीर सिंह रावत शुक्रवार को इंदौर में थे। उन्होंने नगर अध्यक्ष और महापौर से चर्चा के बाद फिलहाल जीतू यादव की वापसी को होल्ड पर रख दिया है।

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वापसी के दिन ही कैसे दे दिया प्रभार?

उल्लेखनीय है कि जीतू यादव की पार्टी में वापसी का पत्र जिस दिन सार्वजनिक हुआ। उसके कुछ ही घंटे पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जीतू यादव का प्रभार एमआईसी सदस्य निरंजन सिंह गुड्‌डू को दे दिया। यह सबकुछ मात्र एक संयोग नहीं है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा के प्रदेश संगठन का कोई नेता महापौर को यह सबकुछ पहले ही बता चुका था। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसमें नगर अध्यक्ष की भी भूमिका रही है।

18 महीने से क्यों कर रहे थे इंतजार?

महापौर ने कहा था कि नगर निगम का कामकाज प्रभावित हो रहा था, इसलिए जीतू यादव के विभाग का प्रभार निरंजन सिंह गुड्‌डू को दिया। अब यहां सवाल यह उठ रहा है कि जीतू यादव तो 18 महीने से पार्टी और एमआईसी से बाहर थे, तो क्या इतने दिनों में कामकाज प्रभावित नहीं हुआ। अगर प्रभार देना था तो पहले ही दे देते, जीतू की भाजपा में वापसी पर ही प्रभार क्यों दिया?

उठ रहा है दलित पार्षद का भी मामला

भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को इस बात पर आपत्ति है कि महापौर और नगर अध्यक्ष दलित समाज से आने वाले एक पार्षद को क्यों रोक रहे हैं? दरअसल जीतू यादव, जाटव समाज से आते हैं और उनके साथ संगठन के इस व्यवहार से भाजपा के अजा नेताओं में भी आक्रोश है।

संगठन की भूमिका संदेह के घेरे में

जीतू यादव के मामले में इंदौर संगठन की भूमिका पर पहले से ही सवाल उठाए जाते रहे हैं। भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठन ने जीतू यादव को निकालने का फैसला हड़बड़ी में लिया था। इस मामले में ठीक से पड़ताल भी नहीं की गई थी।

पुलिस की क्लिन चिट के बाद हुई वापसी

पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद जीतू यादव का नाम पूरक चालान से हटा दिया गया था। पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस की क्लिन चिट के बाद जीतू यादव की पार्टी में वापसी हुई है।

दादा भक्ति दिखाकर, दादा को ही धोखा!

भाजपा के नेताओं का कहना है कि वर्तमान नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा खुद को दादा यानी रमेश मेंदोला का भक्त बताकर उन्हें ही निपटाने में लगे हैं। इस मामले में महापौर का पूरा साथ उनको मिल रहा है। भाजपा के नेता तो यह भी कह रहे हैं कि क्या जीतू यादव का प्रभार देने से पहले महापौर ने नगर अध्यक्ष से बात की थी?

महापौर डाल रहे संगठन के पाले में गेंद

इस संबंध में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा था कि जीतू यादव के पास विद्युत और वर्कशॉप का प्रभार था। चूंकि काम अटक रहे थे तो निरंजन सिंह गुड्डू को प्रभार दिया था। अब पार्टी जैसा कहेगी, वैसा कर देंगे।

संगठन टालमटोल में लगा

एक तरफ तो महापौर संगठन के पाले में गेंद डाल रहे हैं और दूसरी ओर संगठन यानी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, इसे महापौर की तरफ फेंकने में लगे हैं। भाजपा नेता कह रहे हैं कि दोनों एक-दूसरे की ओर गेंद फेंककर रमेश मेंदोला के साथ खेला कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस खेल का आखिरी परिणाम क्या होता है?

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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