अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ कैरोलाइना में एक चुनावी रैली के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को “अमेरिकी क्षेत्र” बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है।

ईरान को परमाणु हथियार पर सख्त चेतावनी
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ट्रंप ने कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है तो इसके “बहुत बुरे” परिणाम हो सकते हैं। साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन उनकी राय में तेहरान अभी “सही समझौते” के लिए तैयार नहीं है।
ट्रंप के बयान से पहले भी अमेरिका की ओर से होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर कड़े दावे किए गए हैं। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां जारी तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग पर पड़ सकता है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज़ से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की संख्या बेहद कम हुई है।
अमेरिका बढ़ा रहा है आर्थिक दबाव
अमेरिका ईरान पर सैन्य दबाव के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा है। नई पाबंदियों का असर ईरान के कुछ प्रमुख कारोबारी साझेदारों तक पहुंचने की संभावना है। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि होर्मुज से जुड़ा संकट तब तक खत्म नहीं होगा जब तक उसकी प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनती।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से तनाव कम होगा या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर टकराव और बढ़ेगा?
आप क्या सोचते हैं—क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान का टकराव दुनिया में एक बड़े आर्थिक या सैन्य संकट को जन्म दे सकता है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



