प्रशासन की कार्रवाई ने इंदौर के नामी होटल सयाजी की पोल खोल कर रख दी है। कलेक्टर के आदेश पर पहली बार सयाजी होटल का किचन सील हुआ है। फूड लाइसेंस तो निरस्त कर ही दिया गया है। इसका मतलब साफ है कि सयाजी अब अपने गेस्ट को बाहर से खाना लाकर खिलाएगा।
ताज्जुब इस बात का है कि फाइव स्टार होटल जैसा रेट वसूलने वाले इस होटल को आखिर इतनी हिम्मत कहां से मिली कि वह लोगों को गंदा और जहरीला खाना परोसने लगा। सयाजी जैसे होटल में कोई आम जनता तो जाती नहीं है, पैसे वाले रईस लोग यहां इसलिए जेब ढीली करने जाते हैं कि उन्हें उच्च क्वालिटी का स्वास्थ्यवर्द्धक भोजन मिलेगा।
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प्रशासन की जांच में जो भी गड़बड़ियां सामने आई हैं, वैसी हालत तो हाईवे के किनारे ढाबों पर भी नहीं मिलती। सबसे बड़ी बात कि ये ढाबे सयाजी जैसा लोगों को लूटते भी नहीं हैं। लोगों को भी पता है कि रेट के हिसाब से यहां क्या और कैसा खाना मिलेगा? लेकिन, जब आप एक बड़े होटल में इस भरोसे से जाते हो कि वहां सबकुछ ठीक होगा, वही होटल अगर भरोसे को तोड़ता है तो उस पर प्रशासन की कार्रवाई तो बहुत छोटी लगती है।
लोग इस होटल में इसलिए जाते हैं कि उन्हें अच्छा खाना और अच्छी सुविधाओं से मतलब था। आपने होटल बनाने में कितनी गड़बड़ियां कीं या सरकार को कितना चूना लगाया, इससे लोगों का कोई वास्ता नहीं होता। लेकिन, अगर आप भोजन ही गंदा परोसने लगे तो यह तो बहुत बड़ा क्राइम है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि सयाजी होटल आखिर कितने समय से यह कांड कर रहा है? कितने समय से फुटपाथ पर मिलने वाले खाने की क्वालिटी के बदले फाइव स्टार के रेट वसूल रहा है?
और सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना सब करने की हिम्मत आखिर होटल मालिकों को कौन देता है?
अब जबकि प्रशासन ने हिम्मत दिखा ही दी है-इस होटल की पूरी फाइल खुलनी जरूरी है।
यह भी तय है कि अपने प्रभाव से होटल मालिक फिर लाइसेंस बहाल करा लेंगे…किचन खुलवा लेंगे…लेकिन क्या गारंटी है कि फिर से गंदा खाना न परोसें?



