जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल के निरीक्षण को लेकर विवाद बढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच कथित धक्का-मुक्की और विवाद के बाद मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।
CJP की टीम राजकीय प्राथमिक स्कूल रामपुरा कंवरपुरा का निरीक्षण करने पहुंची थी। पार्टी के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूल की स्थिति, शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और स्कूल भवन की हालत का जायजा लेना था।
हालांकि, टीम के पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने मुख्य रास्ते पर घेराबंदी कर वाहनों की जांच शुरू कर दी। CJP कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद ग्रामीणों के साथ उनकी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल के लिए सरकार की ओर से 12.50 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं और गांव के लोग स्कूल की समस्या अपने स्तर पर सुलझा लेंगे। उन्होंने CJP कार्यकर्ताओं को बाहरी व्यक्ति बताते हुए गांव से बाहर कर दिया।
जर्जर स्कूल भवन और टीनशेड में पढ़ाई
विवाद के बीच स्कूल की बदहाल स्थिति भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि मुख्य भवन जर्जर होने के कारण इसे बंद कर दिया गया है। सुरक्षा कारणों से बच्चों को करीब 50 मीटर दूर एक बाड़े में टीनशेड के नीचे पढ़ाया जा रहा है।
स्कूल निरीक्षण पर नई पाबंदी से विवाद और गहराया
CJP के अनुसार, उसके स्कूल निरीक्षण अभियान के बाद शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में मीडिया और आम लोगों के अनावश्यक प्रवेश पर रोक लगा दी। CJP के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने आने से रोकना चाहती है।
अब यह विवाद सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं रह गया है। मुद्दा यह है कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति की निगरानी कौन करे और बच्चों को बेहतर सुविधाएं कैसे मिलें?
आपकी राय क्या है? क्या सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति सामने लाने के लिए स्वतंत्र निरीक्षण जरूरी है, या स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर नियम सख्त होने चाहिए? बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के लिए आपकी प्राथमिकता क्या होगी?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं और इस मुद्दे पर चर्चा में शामिल हों।



