नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बड़ा बयान दिया। पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। ‘पेपर लीक इसलिए हो रहे हैं क्योंकि व्यवस्था में नाकाबिल लोग बैठे हैं’ आशुतोष रांका ने कहा कि देश में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसका मूल कारण व्यवस्था की कमजोरियां, अक्षमता और कथित भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों के मन में कानून का डर पैदा हो। रांका के मुताबिक, पेपर लीक किसी एक व्यक्ति का काम नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क या गिरोह के शामिल होने की आशंका रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाओं में नीचे से लेकर ऊपर तक कई स्तर पर लोग शामिल हो सकते हैं और आर्थिक लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ दोषियों को गिरफ्तार करना या फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाना पर्याप्त नहीं है। सरकार को उस पूरी व्यवस्था को मजबूत करना होगा, जहां पेपर लीक की कोई गुंजाइश ही न बचे।
पीएम मोदी के बयान पर रांका का तंज- ‘चोट लगने के बाद मरहम लगाने जैसा’
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पीएम मोदी के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार का यह कदम चोट लगने के बाद मरहम लगाने जैसा है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल कार्रवाई को लेकर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को बदलने को लेकर है, जिसकी वजह से बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं। रांका ने सवाल उठाया कि अगर देश में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है और इस समस्या को रोकने के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?
फास्ट ट्रैक कोर्ट से नहीं होगा स्थायी समाधान?
CJP प्रवक्ता ने कहा कि देश में पहले भी कई बड़े मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं, लेकिन इससे मूल समस्या खत्म नहीं हुई। उनके मुताबिक, जब तक परीक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों और कथित भ्रष्टाचार को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक केवल कानूनी कार्रवाई से पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि इसकी जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालय और अधिकारियों तक भी जाती है। रांका ने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय नहीं होती और उनका इस्तीफा नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।



