नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और विदेशी नेताओं से मुलाकात के अंदाज पर राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया। राहुल गांधी ने पीएम मोदी के विदेशी नेताओं से गले मिलने की शैली की नकल करते हुए इसे ‘हग डिप्लोमेसी’ से जोड़कर तंज कसा।
राहुल गांधी ने मंच पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के साथ गले मिलने का अंदाज दिखाया। इसी दौरान संदीप दीक्षित ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र किया, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बयानबाजी तेज हो गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस टिप्पणी पर राहुल गांधी ने भी जवाब दिया।
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जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
राहुल गांधी के इस अंदाज पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा विपक्ष का नेता देखना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के लिए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि उसे राहुल गांधी को अपना नेता मानना पड़ रहा है। बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी के बयान और उनके अंदाज को लेकर लगातार आलोचना की।
‘हग डिप्लोमेसी’ पर क्यों छिड़ी बहस?
राहुल गांधी का निशाना प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति और विदेशी नेताओं के साथ उनके सार्वजनिक व्यवहार पर था। वहीं बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष का नेता प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप भाषा और व्यवहार नहीं कर रहा।
इस पूरे विवाद में मेलोनी का जिक्र भी चर्चा का केंद्र बन गया है। इससे भारत की घरेलू राजनीति में एक बार फिर पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकातों से जुड़े सोशल मीडिया विमर्श को हवा मिल गई है।
अब बहस सिर्फ राहुल गांधी की टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राजनीतिक आलोचना में हास्य और नकल की सीमा तय होनी चाहिए?
बड़ा सवाल
क्या राहुल गांधी का पीएम मोदी की ‘हग डिप्लोमेसी’ की नकल करना राजनीतिक व्यंग्य है या विपक्ष के नेता के पद की गरिमा के खिलाफ?
आपकी राय क्या है? क्या नेताओं को राजनीतिक विरोध में हास्य और व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए, या ऐसी नकल लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा है?
कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए।



