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नई दिल्ली। पहलगाम हमले के बाद हवाई हमलों से बचाव के लिए गृह मंत्रालय ने 7 मई को ब्लैक आउट एक्सरसाइज यानी मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले 1971 में भारत–पाकिस्तान युद्ध के समय ऐसी मॉक ड्रिल हुई थी।
इस मॉक ड्रिल का मकसद लोगों को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार करना है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की। वहीं पिछले दिनों वे एयरचीफ मार्शल एपी सिंह और नेवी चीफ दिनेश कुमार त्रिपाठी से भी मिल चुके हैं। बताया जाता है कि वायुसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री मोदी को युद्ध की तैयारियों पर जानकारी दी। रविवार की इस मीटिंग में बताया कि एयर फोर्स हर हालात से निपटने को तैयार है। पश्चिमी सीमा पर डिफेंस नेटवर्क भी पूरी तरह एक्टिव है और राफेल भी तैयार हैं।
मॉक ड्रिल में क्या-क्या होगा
मॉक ड्रिल में सबसे पहले, एयर रेड वार्निंग सायरन को चालू किया जाएगा। लोगों और छात्रों को सिविल डिफेंस के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी कि हमले की स्थिति में खुद को कैसे बचाएं। क्रैश ब्लैक आउट के उपाय किए जाएंगे। इसका मतलब है कि हमले के दौरान रोशनी बंद करने यानी क्रैश ब्लैक आउट की व्यवस्था की जाएगी। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को जल्दी से छिपाने की व्यवस्था की जाएगी। निकासी योजना यानी एवेकुएशन प्लान क्या होगा, इससे लोगों को अपडेट किया जाएगा। इसके साथ ही उसका अभ्यास भी किया जाएगा। एवेकुएशन प्लान का मतलब है कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की योजना। इससे पहले 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के दौरान ऐसी मॉक ड्रिल हुई थी।
कल पंजाब में हुआ था ब्लैक आउट अभ्यास
पंजाब के फिरोजपुर छावनी बोर्ड ने रविवार को 30 मिनट का ब्लैकआउट अभ्यास किया था। ब्लैकआउट अभ्यास रात नौ बजे से साढ़े नौ बजे तक छावनी क्षेत्र में किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य युद्ध के खतरे के दौरान ब्लैकआउट प्रक्रियाओं को लागू करने की तैयारी और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है।



