👉 यह भी पढ़ें:
- मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान से सियासत गरम, निशिकांत दुबे का पलटवार
- PM Modi के वीडियो डिलीट करने के मामले में निशिकांत दुबे की चेतावनी-तीन दिन में माफी मांगें जुकरबर्ग
- PM Modi के वीडियो डिलीट करने के मामले में संसदीय समिति ने दिखाई सख्ती, निशिकांत दुबे ने कहा-मार्क जुकरबर्ग मांगे माफी
- BJP MP Nishikant Dubey का दावा-राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने के लिए जल्द पेश होगा प्रस्ताव
- बीजू पटनायक पर विवादित बयान देकर फंसे भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, माफी मांगते हुए कहा-मैं तो नेहरू पर बोल रहा था
- निशिकांत दुबे के प्रस्ताव पर राहुल गांधी का पलटवार, कहा- मुकदमा दर्ज करवाएं या विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएं, वे किसानों की लड़ाई लड़ते रहेंगे
0:00 left
नई दिल्ली। झारखंड के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त होने की वर्षगांठ उन्होंने कहा कि जनता ने 20 मार्च 1977 को गांधी परिवार के अहंकार को जमीन पर ला दिया और खुद इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं। उन्होंने कहा कि 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त हुआ, जिसे उन्होंने इंदिरा गांधी की दमनकारी नीतियों का परिणाम बताया।
सोशल मीडिया पर दुबे ने लिका कि इमरजेंसी के दौर में नागरिक अधिकारों का हनन हुआ और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के केंद्रीकरण ने संविधान की मूल भावना को नुकसान पहुंचाया और देश को गंभीर संकट में डाल दिया। दुबे ने आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि लाखों लोगों को जबरन जेल में डाला गया और हजारों लोगों की पुलिस हिरासत या अत्याचार में मौत हुई। 1 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई। प्रेस की स्वतंत्रता पर पूरी तरह रोक लगाई गई। मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए और 42वें संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा का कार्यकाल 6 साल किया गया। निशिकांत दुबे ने अपने पोस्ट में भारत के गजट की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें आपातकाल के दौरान किए गए संवैधानिक संशोधनों का उल्लेख था। उन्होंने कहा कि इन संशोधनों ने न्यायिक समीक्षा और संस्थागत संतुलन को कमजोर कर दिया?



