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नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की बुलडोजर वाली टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हालांकि, उन्होंने सोनिया गांधी का नाम नहीं लिया। राज्यसभा की सांसद सोनिया गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि वक्फ बिल को जबरदस्ती पारित कराया गया है। ये विधेयक संविधान पर सरेआम हमला है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बजट सत्र के आखिरी दिन सोनिया गांधी की टिप्पणी का उल्लेख किया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि एक वरिष्ठ सदस्य की ओर से लोकसभा की कार्यवाही पर प्रश्न उठाना उचित नहीं है।
उल्लेखनीय है कि सोनिया गांधी ने गुरुवार को सरकार पर वक्फ (संशोधन) विधेयक को मनमाने ढंग से पारित कराने का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि यह विधेयक संविधान पर सरेआम हमला है। यह समाज को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में बनाए रखने की भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। लोकसभा में किरेन रिजिजू ने सोनिया गांधी का नाम लिए बिना कहा कि कई सांसदों ने मुझे बताया कि दूसरे सदन की एक सदस्य ने यह आरोप लगाया कि चर्चा के बिना बुलडोज करके विधेयक पारित किया गया। जबकि नियम और प्रक्रिया को पालन करके यह विधेयक पारित किया गया है। इसकी तारीफ करने के बजाय यह कहा गया कि बुलडोज करके विधेयक पारित किया गया। रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष से इस पर एक व्यवस्था देने का आग्रह किया।
बिरला ने कहा-संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं
इस पर बिरला ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की एक वरिष्ठ सदस्य हैं, जो इस सदन की सदस्य रह चुकी हैं और अब दूसरे सदन की सदस्य हैं, उन्होंने संसद परिसर में यह बयान दिया गया है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक जबरदस्ती पारित कराया गया। वक्फ संशोधन विधेयक पर सदन में 13 घंटे और 53 मिनट चर्चा की गई, जिसमें सभी सदस्यों ने अपने विचार रखे। इस विधेयक पर तीन बार मत विभाजन हुआ। अत: यह विधेयक सदन के नियमों के अनुसार पारित किया गया। बिरला ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सदन की कार्यवाही पर एक वरिष्ठ सदस्य की ओर से प्रश्न उठा गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह उचित नहीं है और संसदीय मर्यादा के अनुरूप भी नहीं है।



