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पाकिस्तान से बातचीत पर मणि शंकर अय्यर का बयान, बोले—दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को आसानी से समझ सकते हैं
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर ने पाकिस्तान के साथ संवाद की अहमियत पर जोर देते हुए कहा है कि भारत और पाकिस्तान के आम नागरिकों के बीच बातचीत सबसे आसान होती है। उनका कहना है कि दोनों देशों के लोगों की भाषा, मानसिकता और संस्कृति काफी हद तक समान है, इसलिए वे एक-दूसरे को अच्छी तरह समझ सकते हैं।
अय्यर ने कहा कि पाकिस्तान के कबाब शायद भारत से बेहतर हों, लेकिन इस पर दोस्ताना प्रतिस्पर्धा हो सकती है कि किसके कबाब ज्यादा अच्छे हैं।
उन्होंने भारत की विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठाए। अय्यर ने कहा कि भारत अचानक अमेरिका के इतना करीब क्यों हो गया है और इजराइल के साथ भी इतने घनिष्ठ संबंध क्यों बना लिए हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि भारत रूस पर इतनी निर्भरता क्यों रखता है।
विभाजन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर उस समय देश का बंटवारा नहीं हुआ होता, तो आज पाकिस्तान के नागरिक भी भारत के नागरिक होते। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद हम उनके खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की बात करते हैं। उनका कहना था कि अगर वास्तव में साहस दिखाना है, तो आमने-सामने बैठकर बातचीत करनी चाहिए।
अय्यर ने कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार संवाद जरूरी है, क्योंकि बातचीत के दौरान दोनों पक्ष अपनी शिकायतें रख सकते हैं और गलतियों को समझ सकते हैं। उन्होंने इसे एक लंबी प्रक्रिया बताया, जो महीनों तक चल सकती है और जिसमें इतिहास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा करनी होगी।
उन्होंने देश में हिंदू राष्ट्र के विचार को लेकर भी चिंता जताई। अय्यर ने कहा कि इस उपमहाद्वीप में हिंदुओं की संख्या अधिक है, लेकिन मुसलमान सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जिनकी संख्या करीब 20 करोड़ है। इसके अलावा लगभग 5 करोड़ लोग अन्य धर्मों को मानने वाले हैं।
उनका कहना था कि यदि भारत की राष्ट्रीय पहचान हिंदू राष्ट्र के आधार पर बनाई जाती है और मुसलमानों को शत्रु के रूप में देखा जाता है, तो देश के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में भारत कई हिस्सों में बंट सकता है।



