एपस्टीन फाइल्स का वैश्विक भूचाल: 80 देशों में जांच, शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के इस्तीफों की झड़ी
कुख्यात अमेरिकी सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के खुलासे ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। सामने आ रही फाइलों में पैसों के लेन-देन, सोशल नेटवर्किंग और निजी मुलाकातों से जुड़ी चौंकाने वाली जानकारियां शामिल हैं। हजारों ईमेल, तस्वीरें और वीडियो एपस्टीन और उससे जुड़े लोगों के कथित काले कारनामों की परतें खोल रहे हैं। जांच का दायरा अब 80 देशों तक फैल चुका है।
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इन खुलासों के चलते दुनियाभर में कई प्रभावशाली और ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को भारी जनदबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते कई इस्तीफे सामने आए हैं। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को पद छोड़ना पड़ा। उन पर दबाव इसलिए बढ़ा क्योंकि उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने की सिफारिश की थी। बाद में मैकस्वीनी ने स्वीकार किया कि यह सलाह गलत थी और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
नॉर्वे में भी एपस्टीन फाइल्स का असर साफ दिखाई दिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार वरिष्ठ राजनयिक मोना जूल ने एपस्टीन से कथित संबंधों के चलते पद छोड़ने का फैसला किया है। 66 वर्षीय मोना जूल इससे पहले मंत्री रह चुकी हैं और इजरायल, ब्रिटेन व अमेरिका में नॉर्वे की राजदूत के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं।
अमेरिका में एपस्टीन फाइल्स का सबसे गहरा असर देखने को मिला। फरवरी 2026 में ब्रैड कार्प ने एक प्रमुख लॉ फर्म के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया, जब एपस्टीन के साथ उनके ईमेल संपर्क सार्वजनिक हुए। इससे पहले नवंबर 2025 में पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी लैरी समर्स ने एक बोर्ड पद छोड़ते हुए माना कि एपस्टीन से संबंध रखना उनकी बड़ी भूल थी। दिसंबर 2025 में एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंजिनो ने भी विवादों के बीच अपना पद छोड़ दिया, हालांकि उनके खिलाफ सीधे आरोप साबित नहीं हुए।
यूरोप में भी इन फाइल्स का व्यापक प्रभाव पड़ा। फ्रांस के पूर्व मंत्री जैक लैंग ने एक सांस्कृतिक संस्थान के प्रमुख पद से इस्तीफा दिया। स्लोवाकिया में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मिरोस्लाव लाजचाक ने ईमेल विवाद के बाद पद छोड़ा, जबकि स्वीडन में एक वरिष्ठ अधिकारी ने एपस्टीन के निजी द्वीप से जुड़े आरोप सामने आने के बाद इस्तीफा दे दिया।
गौर करने वाली बात यह है कि इन अधिकतर मामलों में किसी अपराध का कानूनी रूप से सिद्ध होना कारण नहीं था, बल्कि एपस्टीन से संपर्क उजागर होने के बाद पैदा हुआ विवाद और जनदबाव ही इस्तीफों की वजह बना। कई संस्थानों ने अपनी साख बचाने के लिए पद छोड़ना ही बेहतर विकल्प माना।



