पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगातार दूसरे दिन सैन्य कार्रवाई जारी रखते हुए कई ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की। अमेरिका का आरोप है कि हाल के दिनों में वाणिज्यिक जहाजों और उनके नागरिक चालक दल पर हुए कथित हमलों के लिए ईरान जिम्मेदार है। इसी के जवाब में यह अभियान चलाया जा रहा है।
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अमेरिकी सेना के अनुसार, मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन मालवाहक जहाजों पर कथित हमलों के बाद सैन्य कार्रवाई तेज की गई। इन हमलों के बाद दक्षिणी ईरान के कई शहरों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई देने और कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की भी खबरें सामने आई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में दक्षिण-पूर्वी ईरान के इरानशहर स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सलमान कमांड मुख्यालय सहित कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा चाबहार, कोनारक, बंदर अब्बास, जास्क, सीरिक और क़ेश्म जैसे क्षेत्रों में भी हमलों की खबरें हैं।
कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि बुशहर प्रांत के चोगदाक क्षेत्र में स्थित IRGC एयरोस्पेस फ़ोर्स की एक सैन्य सुविधा में आग लग गई। हालांकि, आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ युद्ध रोकने के लिए हुआ अंतरिम समझौता अब प्रभावी नहीं माना जा रहा। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह सैन्य टकराव पूर्ण युद्ध में बदल जाएगा? अगर ऐसा हुआ तो क्या इसका असर पूरी दुनिया, तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा?
आपकी क्या राय है? क्या इस संकट का समाधान बातचीत से निकल सकता है या अब हालात और गंभीर होने वाले हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



