सना। यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य यमन में हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में सरकारी सेना के कम से कम 30 जवानों के मारे जाने की खबर है। इसे हाल के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच हुए सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है।
यमन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मारिब और हदरामौत प्रांतों में कई सैन्य शिविरों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। मंत्रालय ने बताया कि हमलों में कई सैनिकों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में जवान घायल भी हुए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से मृतकों की आधिकारिक और सटीक संख्या तत्काल जारी नहीं की गई।
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रक्षा मंत्रालय ने हमलों को “विश्वासघाती” और “आक्रामक कार्रवाई” करार देते हुए कहा है कि इसका जवाब उचित समय और उचित स्थान पर दिया जाएगा। इस बयान के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हूतियों ने क्या कहा?
उत्तर-पश्चिमी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने “बड़े सऊदी सैन्य जमावड़ों” को निशाना बनाया। हूतियों के मुताबिक, ये सैन्य जमावड़े कथित तौर पर किसी सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे थे।
यमन में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन सरकारी सेना का समर्थन करता रहा है। इसी वजह से हूती विद्रोहियों और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच संघर्ष का असर यमन की सीमाओं से बाहर भी देखने को मिलता रहा है।
सऊदी अरब के नजरान में 11 नागरिक घायल
इसी बीच एक अलग हमले में सऊदी अरब के नजरान सीमा क्षेत्र में 11 नागरिकों के घायल होने की खबर सामने आई है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता के अनुसार, यह हमला हूती विद्रोहियों की ओर से किया गया।
गठबंधन की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान के मुताबिक, घायलों में सात सऊदी नागरिक शामिल हैं। इनमें एक महिला और चार साल का बच्चा भी बताया गया है। इसके अलावा यमन, पाकिस्तान और मिस्र के नागरिक भी घायल हुए हैं।
यमन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मध्य यमन में हूती विद्रोहियों के हमले गुरुवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 10:40 बजे किए गए।
इन हमलों के बाद यमन में पहले से जारी तनाव और मानवीय संकट के और गहराने की आशंका बढ़ गई है। अब नजर इस बात पर है कि यमन की सरकारी सेना और उसके सहयोगी इस हमले के जवाब में क्या सैन्य कदम उठाते हैं।
क्या यमन में फिर बढ़ेगा युद्ध का खतरा?
आप क्या सोचते हैं—क्या इन हमलों के बाद यमन में संघर्ष और तेज हो सकता है? क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दोनों पक्षों के बीच तत्काल युद्धविराम के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं और इस खबर को दूसरों तक भी शेयर करें।



