गोवा। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को रेप केस में दोषी करार दिया है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट दिया है। अब हाईकोर्ट उन्हें सजा के मुद्दे पर अलग से सुनेगी। न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। फैसला सुनाए जाने के दौरान तरुण तेजपाल अदालत में मौजूद थे।
2013 का है चर्चित मामला
उल्लेखनीय है कि यह मामला तेजपाल की एक पूर्व महिला सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है। तेजपाल पर पूर्व महिला सहयोगी ने आरोप लगाया था कि 7-8 नवंबर 2013 को गोवा में तहलका पत्रिका के एक समारोह के दौरान होटल की लिफ्ट में तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। निचली अदालत द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने के बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और तेजपाल के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। गोवा सरकार ने तेजपाल के बरी होने पर उठाए थे ये सवाल
👉 यह भी पढ़ें:
- उन्नाव रेप केस के आरोपी कुलदीप सेंगर की बेटी ने लिखी अमित शाह को चिट्ठी, पीड़िता और उसके परिवार की मांगी सुरक्षा
- रायसेन में बच्ची से रेप के आरोपी सलमान को पुलिस ने किया गिरफ्तार, भागने की कोशिश में पैर में लगी गोली, अस्पताल में चल रहा इलाज
- दुर्गापुर में एमबीबीएस स्टूडेंट से गैंगरेप के मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार, देर रात बंगाल पुलिस का एक्शन
- पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना रेप केस में दोषी करार, जेडीएस ने पहले ही कर दिया था निष्कासित
- आईआईएम कोलकाता रेप केस में नया मोड़, पिता ने किया दुष्कर्म से इनकार, कहा-ऑटो से गिर गई थी बेटी
- कोलकाता लॉ कॉलेज सामूहिक दुष्कर्म मामला: TMC नेताओं के विवादित बयानों से बढ़ा सियासी बवाल
होटल की लिफ्ट के वीडियो क्लिप दिखाए गए
न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने सरकार की अपील पर अंतिम दलीलों की सुनवाई शुरू की थी। सुनवाई के दौरान, पीठ के सामने उस होटल की लिफ्ट के वीडियो क्लिप दिखाए गए, जहां कथित तौर पर यह घटना हुई थी। हालांकि इन क्लिप को सिर्फ अदालत कक्ष में मौजूद लोगों को ही दिखाया गया। तेजपाल की ओर से पेश वकील आबाद पोंडा ने जांच अधिकारी और अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयानों में मौजूद विरोधाभासों की ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि अपनी पुलिस शिकायत में पीड़िता ने लिफ्ट में दो मिनट के सदमे का जिक्र किया था। पोंडा ने बताया कि महिला का दावा था कि आरोपी लिफ्ट के बटन दबाता रहा, ताकि लिफ्ट चलती रहे। उन्होंने वीडियो क्लिप आगे दिखाते हुए दलील दी कि पीड़िता का कहना है कि उसे लिफ्ट में पीछे खींचा गया और उसके साथ बदसलूकी की गई, लेकिन वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखता।
हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने की थी अपील
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन करने के बजाय पीड़िता के व्यवहार और पृष्ठभूमि पर अधिक ध्यान दिया। तेजपाल के माफी मांगने वाले ई-मेल सहित कई महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया गया था।। हाईकोर्ट ने राज्य की अपील स्वीकार करते हुए बरी करने का फैसला रद्द कर दिया और तेजपाल को दोषी ठहराया। अब अदालत सजा की अवधि पर अलग से सुनवाई करेगी।



