अदन। यमन के दक्षिणी तट से लगे Gulf of Aden यानी अदन की खाड़ी में एक टैंकर के बेहद करीब जोरदार धमाका सुनाई देने के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। घटना ऐसे समय हुई है जब लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के चलते तनाव लगातार बढ़ रहा है। ब्रिटेन की United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) ने बताया कि घटना अदन से करीब 95 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में हुई। टैंकर के कप्तान ने जहाज के बेहद करीब तेज धमाके की आवाज सुनने की जानकारी दी। राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं।
घटना के कारणों की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। यमन के अल-बैदा प्रांत के हूती नियंत्रण वाले इलाके से स्थानीय सूत्रों ने दावा किया कि इसी क्षेत्र से अदन की खाड़ी की दिशा में एक मिसाइल दागे जाने की जानकारी मिली थी। हालांकि, इस कथित मिसाइल प्रक्षेपण और टैंकर के पास हुए धमाके के बीच सीधा संबंध अभी साबित नहीं हुआ है। हूती विद्रोहियों ने घटना की तत्काल जिम्मेदारी भी नहीं ली थी।
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इस बीच हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि संगठन ने ‘डेजी’ नामक सऊदी तेल टैंकर को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया और हमले के बाद जहाज को अपना रास्ता बदलकर लौटना पड़ा। हूतियों के मुताबिक, यह हमला सऊदी अरब के खिलाफ घोषित समुद्री नाकेबंदी का हिस्सा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हूतियों ने इससे पहले उत्तरी लाल सागर में सऊदी टैंकर ‘वफा’ को भी मिसाइलों से निशाना बनाने का दावा किया था। सऊदी अधिकारियों की ओर से इन दावों पर तत्काल पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Gulf of Aden, Red Sea और Bab el-Mandeb अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग हैं। यहां किसी भी हमले या सुरक्षा संकट का असर जहाजों के रूट, बीमा लागत, माल ढुलाई और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में क्षेत्र में जहाजों को लेकर कई सुरक्षा घटनाएं सामने आई हैं। UKMTO लगातार क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की सलाह देता रहा है।
क्या Red Sea Crisis और Gulf of Aden में बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है? क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए और कड़े कदम उठाने चाहिए? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।



