यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जिजान स्थित सऊदी अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन हमले का दावा किया है। हूती समर्थित समाचार एजेंसी सबा के मुताबिक, यह हमला यमन के सादा और हज्जा प्रांतों में कथित हवाई क्षेत्र उल्लंघन के जवाब में किया गया। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने हूतियों के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सऊदी अरब, हूती विद्रोही, लाल सागर और तेल आपूर्ति को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले भी जिजान और यनबू में अरामको से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने के दावे सामने आए थे। जुलाई में जिजान रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद संयंत्र को अस्थायी रूप से बंद किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
👉 यह भी पढ़ें:
- Yemen Attack: हूतियों के मिसाइल-ड्रोन हमले से दहला यमन, 30 से ज्यादा सैनिकों की मौत; सऊदी सीमा पर भी 11 घायल
- Gulf of Aden में टैंकर के पास जोरदार धमाका, हूतियों ने सऊदी ऑयल टैंकर पर मिसाइल हमले का किया दावा; बढ़ा Red Sea Crisis
- US-Iran Conflict: ईरान के ‘अचानक मिसाइल हमले’ का अमेरिकी दावा, जवाब में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त एयरस्ट्राइक से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
- अमेरिका-सऊदी अरब की ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील! क्या सऊदी अरब को मिल सकती है यूरेनियम संवर्धन की मंजूरी?
- Saudi Arabia vs Houthi: सऊदी एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमला, Middle East में बढ़ा युद्ध का खतरा
- Saudi Arabia Oil Price Cut: 26 साल की सबसे बड़ी कटौती! क्या भारत में Petrol-Diesel और LPG होंगे सस्ते?
लाल सागर से लेकर वैश्विक तेल बाजार तक असर
हूतियों की गतिविधियों ने Red Sea Shipping, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सऊदी तेल टैंकरों और तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों के खतरे के बीच कुछ जहाजों ने अपनी आवाजाही और ट्रैकिंग रणनीति बदली है। इससे शिपिंग लागत, बीमा और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
जिजान रिफाइनरी की क्षमता लगभग 4 लाख बैरल प्रतिदिन है, इसलिए किसी लंबे व्यवधान का असर क्षेत्रीय ईंधन बाजार पर पड़ सकता है।
क्या फिर भड़क सकता है यमन युद्ध?
सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन लंबे समय से यमन की सरकारी सेना का समर्थन करता रहा है, जबकि हूती समूह देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण रखता है। मौजूदा हमले और जवाबी कार्रवाई इस बात की चिंता बढ़ा रहे हैं कि वर्षों से अपेक्षाकृत शांत पड़ा संघर्ष फिर बड़े
आपकी राय क्या है? क्या हूती हमलों से लाल सागर में तनाव और वैश्विक तेल संकट और गहरा सकता है? क्या सऊदी अरब और हूतियों के बीच टकराव बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



