बद्रीनाथ मंदिर के कपाट आज सुबह आम श्रद्धालुओं के लिए विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। इससे पहले गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल चुके हैं।
आज प्रातः सवा छह बजे बैसाख मास के शुक्ल पक्ष, पुनर्वसु नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्ध योग के शुभ संयोग में मंदिर के कपाट खोले गए। इस पावन क्षण के साक्षी पुष्कर सिंह धामी भी बने।
👉 यह भी पढ़ें:
- आस्था का अद्भुत पर्व: केदारनाथ धाम के कपाट खुले, गूंज उठा ‘हर-हर महादेव’
- भाई दूज पर केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद, छह माह ऊखीमठ में होगी पूजा
- 54 साल बाद खुला वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर का तहखाना, कोर्ट की निगरानी में हुई कार्रवाई
- नालूपानी में भूस्खलन से बंद गंगोत्री हाईवे दो दिन बाद खुला
- इजराइल -ईरान संघर्ष ने पकड़ा और जोर, अमेरिका ने भी खोला मोर्चा
- इजराइल -ईरान संघर्ष ने पकड़ा और जोर, अमेरिका ने भी खोला मोर्चा
कपाट खुलने से पहले ही धार्मिक परंपराओं के तहत आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी, उद्दव और तेल कलश धाम पहुंच चुके थे, जबकि कुबेर की डोली रात्रि विश्राम के लिए बामणी गांव में ठहरी थी।
पूरे मंदिर परिसर और आसपास के प्राचीन मठ-मंदिरों को लगभग 25 क्विन्टल ऑर्किड और गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है, जिससे धाम की आभा और भी दिव्य हो उठी है।
कपाट खुलने से पहले ही यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी। अब तक करीब साढ़े पांच सौ वाहन धाम पहुंच चुके हैं, और अखंड ज्योति के दर्शन के लिए दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
बद्रीनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालु जहां गहरी आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं, वहीं हिमालय की गोद में बसे इस दिव्य स्थल के प्राकृतिक सौंदर्य का भी भरपूर आनंद उठाते हैं।



