नई दिल्ली। तमिलनाडु में प्रवेश की आस में बैठी भाजपा ने कभी के.अन्नामलाई को अपना चेहरा बनाया था। इस विधानसभा चुनाव में अन्नमलाई और भाजपा के बीच दूरी नजर आई। अब अटकलें चल रही हैं कि वे भाजपा छोड़कर अपनी पार्टी बनाने जा रहे हैं। सोमवार को वे दिल्ली में थे, जब मीडिया ने उनसे सवाल किया गया कि क्या वो भाजपा छोड़ रहे हैं, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा…दो दिन रुक जाइए।
इससे साफ है कि उनके मन में कुछ पक रहा है, जो जल्दी ही सामने आएगा। अन्नामलाई ने भाजपा के लिए आईपीएस की नौकरी त्याग दीथी। उन्होंने साफ कह दिया था कि तमिलनाडु में अगर बीजेपी को मजबूत होना है, तो जय श्री राम के साथ तमिल अस्मिता और पेरियार की धरती के मिजाज को मिलाना होगा। इसके बावजूद भाजपा अन्नामलाई की मर्जी के बिना बीजेपी ने उसी एआईएडीएमके से दोबारा हाथ मिला लिया जिसे अन्नामलाई फूटी आंखों भी नहीं देखना चाहते।
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एआईएडीएमके से बढ़ी दूरी
अन्नामलाई ने भाजपा को मजबूत करने के लिए प्रदेश में ‘एन मण, एन मक्कल’ यात्रा निकाली। इसे लोगों का सपोर्ट भी मिला और भाजपा का माहौल भी बनने लगा। इसी बीच भाजपा ने एआईएडीएमके से हाथ मिला लिया। इसके बाद से अन्नामलाई और भाजपा के बीच दूरी बढ़ने लगी।
भाजपा के लिए जी-जान से जुटे रहे
अन्नामलाई ने भाजपा के लिए जी-जान से जुटे रहे। अब जब अन्नामलाई दूरी बनाते दिख रहे हैं और उनकी जगह नैनार नागेंद्रन जैसे सीधे-साधे, गठबंधन वाले नेता को बैठा दिया गया है, तो पार्टी के लिए राह आसान नहीं होने वाली। जानकर तो यह भी कह रहे हैं कि भाजपा वहां अपने लिए खुद ही गड्ढा खोद रही है।
अगर नया दल बनाया तो क्या होगा
अन्नामलाई के नया फ्रंट बनाते ही तमिलनाडु की सियासत चार खानों में बंट जाएगी। एक तरफ डीएमके होगी, दूसरी तरफ एआईएडीएमके और भाजपा। एक हिस्सा जोसेफ विजय का होगा और चौथा हिस्सा अन्नामलाई का। जानकार कह रहे हैं कि अगर अन्नामलाई खुद के दम पर मैदान में आए तो कई दलों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। अब देखना है, आगे क्या होता है?



