नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय के बाद खुद को एक अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग की है। लोकसभा स्पीकर इस पर दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कोई फैसला देंगे। स्पीकर ने टीएमसी की तरफ से पक्ष रखने के लिए अभिषेक बनर्जी को 19 जून को बुलाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी को 19 जून को बैठक के लिए बुलाया है, ताकि वे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी में हुई टूट के मामले में अपना पक्ष रख सकें। बागी सांसद पहले ही बिरला से मिल चुके हैं, जबकि ममता के गुट ने उनसे मिलने के लिए समय मांगा था।
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ममता बनर्जी के गुट ने लिखी थी चिट्ठी
ममता बनर्जी के गुट ने ओम बिरला को पत्र लिखा था। इस चिट्ठी में स्पीकर से गुजारिश की गई कि वे लोकसभा में टीएमसी के किसी भी बागी गुट को मान्यता न दें और न ही उन्हें अलग दर्जा दें। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी एक एकल, अविभाज्य राजनीतिक पार्टी है और इसकी विधायी शाखा को मूल संगठन से अलग नहीं किया जा सकता है। साथ ही, सिर्फ हस्ताक्षरों के आधार पर बना कोई अलग हुआ गुट मान्यता का दावा नहीं कर सकता।
बागी खेमे ने एनसीपीआई में किया है विलय
इससे पहले तृणमूल के बागी खेमे ने 2023 में अस्तित्व में आई पूर्वोत्तर की राजनीतिक पार्टी- एनसीपीआई में विलय का एलान किया था। ये पार्टी त्रिपुरा का एक पंजीकृत गैर-मान्याप्राप्त दल है। इस पार्टी का गठन 2022 में हुआ था। शिवली कुंडू इसकी संस्थापक अध्यक्ष हैं। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। दोनों ही उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
बगावत से जूझ रही है टीएमसी
विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार के बाद टीएमसी में बगावत जारी है। पहले 58 विधायकों ने बगावत की। इसके बाद पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग होकर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय का एलान कर दिया। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद हर कोई एनसीपीआई के बारे में जानना चाहता है। ये बागी लोकसभा अध्यक्ष से मिलने के पहले भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल में पार्टी के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव से भी मिले।



